Sunday, 21 June 2020

Understanding Share Markets in Hindi आईये चलें बाजार की सैर को


Understanding Share Markets in Hindi क्या आप भी डरते हैं Share Markets शेयर बाजार की ऊंची नीची चाल से? जिस चीज से आपको डर लगे उस चीज के बारे में अधिक से अधिक जानकारी एकत्र करना शुरू कर दीजिये, आपका डर समाप्त होने लगेगा। आईये देखें अब तक की Share Markets  शेयर बाजार की चाल और उसे थोड़ा समझने की कोशिश करें। मुम्बई स्टाक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक जिसे संक्षेप में Sensex सेंसैक्स कहा जाता है, वहां के सर्वोच्च 30 शेयरों पर आधारित है।

 

सेंसैक्स का आधार है 31 मार्च 1979. इस दिन यदि किसी व्यक्ति ने बिना किसी रिसर्च के केवल टाप के 30 शेयरों में एक लाख रुपये निवेश किये होते तो आज  यानी 12 जनवरी 2015 को उनकी कीमत लगभग 276 गुणा यानी दो करोड़ छयत्तर लाख रुपये होती।

शेयर बाजार में लंबी अवधी का निवेश सदैव लाभ देता है क्योंकि लम्बी अवधी की चाल पूर्णतः औद्योगिक विकास पर निर्भर करती है। छॊटी अवधी में बाजार भावनाओं पर आधरित होता है तथा उस समय के समाचारों और घटनाओं से प्रभावित हो सकता है।                      यदि आप एक वर्ष के लिये निवेश करते हैं तो मार्च 2005 तक के आंकड़ॊं के अनुसार 26 के अनुपात में हानि की संभावना है 10. और यदि आप पांच वर्ष तक निवेशित रहते हैं तो 22 के अनुपात में हानि की संभावना है मात्र 3. इसी प्रकार यदि आप 15 या अधिक वर्षों तक निवेशित रहते हैं तो हानि की संभावना बचती ही नहीं।

छोटी अवधी में आप असाधारण लाभ अथवा असाधारण हानिप्राप्त कर सकते है यानि बाजार रोलर्कोस्टर सा चलता प्रतीत होता है।लम्बी अवधी में बाजार वस्तविक औद्योगिक विकास के बराबर जरूर पंहुंच जायेगा यानी बाजार रॉकेट की तरह केवल ऊपर की और ही जाता दिखता है। इसे आप यहां दिये आंकड़ों से भली प्रकार समझ सकते हैं।तो बाजार का पहला मंत्र है धैर्य।

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शेयर बाजार  क्या है और कैसे काम करता है

जब भी हम किसी बाज़ार की कल्पना करते है तो हमारे दिमाग में किसी ऐसी जगह की इमेज बनती है
जहाँ बहुत-सी दुकानें होंगी या कोई मॉल जहां जाकर आप खरीदारी कर सकते हैं मगर शेयर बाजार ऐसा
बाजार नहीं है. शेयर बाजार में खरीदने और बेचने का काम पूरी तरह से कंप्यूटर द्वारा ऑटोमेटिक तरीके से होता है. कोई भी शेयर खरीदने या बेचने वाला अपने ब्रोकर के द्वारा एक्सचेंज  पर अपना आर्डर  देता है
और पलक झपकते ही पेंडिंग आर्डरों के अनुसार ऑटोमेटिकली सौदे का मिलान हो जाता है.

 

शेयर बाजार में काम के घंटों में ब्रोकर अपने ग्राहकों के लिए उनके द्वारा दिए गए आर्डर टर्मिनल में
डाल देते हैं.  इसके बदले में ब्रोकर को ब्रोकरेज या दलाली मिलती है.

हम कह सकते हैं कि मुख्यतः  शेयर बाजार की तीन कड़ियाँ हैं स्टॉक एक्सचेंज, ब्रोकर और निवेशक.
ब्रोकर स्टॉक एक्सचेंज के सदस्य होते है और केवल वे ही उस स्टॉक एक्सचेंज में ट्रेडिंग कर सकते हैं. ग्राहक सीधे जाकर शेयर खरीद या बेच नहीं सकते उन्हें केवल ब्रोकर के जरिए ही जाना पड़ता है.                                                                                                                          देश में मुख्यतः  BSE यानी मुंबई स्टॉक एक्सचेंज और NSE यानी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज हैं जिन पर
शेयरों का कारोबार होता है. अधिकतर कंपनियां जिनके शेयर मार्केट में ट्रेड होते हैं इन दोनों स्टॉक
एक्सचेंज पर लिस्टेड है मगर यह भी हो सकता है की कोई कंपनी इन दोनों में से किसी एक ही एक्सचेंज पर लिस्टेड हों.

देश के मुख्यता सभी बड़े बैंक या उनकी सबसिडी कंपनियां और अन्य बड़ी वित्तीय कंपनियां इन एक्सचेंजों में ब्रोकर के तौर पर काम करती हैं.

 

ग्राहक इन ब्रोकर कम्पनियों के पास जाकर अपने डीमैट अकाउंट की जानकारी देकर अपना खाता
ब्रोकर के पास खुलवा सकता है.  इस प्रकार ग्राहक का डीमैट एकाउंट ब्रोकर के अकाउंट से जुड़ जाता है
और खरीदी अथवा बेची गई शेयर्स ग्राहक के डीमैट अकाउंट से ट्रांसफर हो जाती हैं.  इसी प्रकार ग्राहक
अपना बैंक खाता भी ब्रोकर के खाते के साथ जोड़ सकता है जिससे खरीदे अथवा बेचे गए शेयरों की
धनराशि ग्राहक के खाते में ट्रांसफर की जाती है. ग्राहक द्वारा खरीदे गए शेयर इलेक्ट्रॉनिक रूप में उसके
डीमैट एकाउंट में पड़े रहते हैं जब भी कोई कंपनी डिविडेंड की घोषणा करती है तो डीमैट अकाउंट से जुड़े
बैंक खाते में डिविडेंड की राशि पहुंच जाती है. इसी प्रकार यदि कंपनी बोनस शेयरों की घोषणा करती है तो बोनस शेयर भी शेयरहोल्डर के डीमैट अकाउंट में पहुंच जाते हैं. ग्राहक जब शेयर बेचता है तो उसी डीमैट अकाउंट से वह शेयर ट्रान्सफर हो जाता है.

शेयरों में कारोबार करने के लिए एक निवेशक के पास डीमैट अकाउंट, ब्रोकर के पास ट्रेडिंग अकाउंट और
उससे जुडा एक बैंक खाता होना जरूरी है. कई बैंक इसके लिए थ्री इन वन खाता खोलने की सुविधा भी देते हैं.

अधिकतर ब्रोकर हाउस आपको ऑनलाइन शेयर ट्रेडिंग की सुविधा भी प्रदान करते हैं इसके अलावा आप फोन करके भी अपने ऑर्डर दे सकते है.

यदि आप भी शेयर बाजार में निवेश करना चाहते हैं तो शेयर बाजार क्या है और शेयर बाजार कैसे काम करता है यह आपके लिए   समझना बहुत आवश्यक है.

Share Market in Hindi शेयर बाजार  या शेयर मार्किट में पैसा बनाना बहुत आसान है उसी प्रकार शेयर बाजार में पैसा खोना भी बहुत आसान है। इससे बचा जा सकता है अगर आप स्वंय शेयर बाजार के बारे में अधिक से अधिक जानकारी एकत्र करें,शोध करें और दूसरों के दिये टिप्स पर न जायें। शेयर बाजार एक खतरनाक खेल है, इसमें कूदने से पहले इसके बारे में अधिक से अधिक जानकारी ले लेना बहुत आवश्यक है। मगर इसका मतलब यह बिलकुल नहीं है कि शेयर मार्किट में निवेश करने के लिए कोई अलग तरह की प्रतिभा या योग्यता ही चाहिए. कोई भी कोशिश करके शेयर बाजार की जानकारी ले सकता है.

शेयर क्या होते हैं Shares in Hindi

                                 शेयर क्या होते हैं Shares in Hindi. शेयर का अर्थ है अंश यानी हिस्सा यदि आपके पास किसी कंपनी के शेयर है तो आप
उस कंपनी के उतने हिस्से के मालिक बन जाते हैं जितने शेयर आपके पास हैं. शेयर को हिंदी में अंश कहते हैं और शेयर होल्डर को
अंशधारक. शेयर बाजार से शेयर खरीद कर आप भी वहां लिस्टेड किसी भी कंपनी के मालिक बन सकते हैं. आप जितना शेयर खरीदेंगे उस कंपनी में आप उतने ही हिस्से के मालिक बन जाएंगे. सभी शेयर कंपनी द्वारा घोषित किये गए सभी Dividend डिविडेंड अथवा Bonus Share बोनस शेयर के अधिकारी होते हैं.

किसी भी कंपनी को शुरू करने के लिए बहुत बड़ी पूंजी की आवश्यकता होती है यह बहुत कठिन है कि इतनी बड़ी पूंजी कोई एक व्यक्ति अपने पास से उस कंपनी में लगा सके यदि उस बड़ी पूंजी को छोटे-छोटे अंशों अथवा शेयरों में बांट दिया जाए तो बहुत से व्यक्ति उस कंपनी में हिस्सेदारी खरीदकर उस कंपनी के मालिक बन सकते हैं कोई भी व्यक्ति अपनी क्षमता के अनुसार शेयर खरीद कर कंपनी के उतने ही हिस्से का मालिक बन सकता है जितनी उसकी क्षमता है. कोई भी व्यक्ति आसानी से किसी कंपनी के शेयर खरीद सके इसके लिए आवश्यक है कि वह कंपनी किसी ना किसी स्टॉक एक्सचेंज पर लिस्टेड हो. एक बार यदि कोई कंपनी किसी स्टॉक एक्सचेंज में लिस्टेड हो जाती है तो उस कंपनी के शेयरों की ट्रेडिंग स्टॉक एक्सचेंज में शुरू हो जाती है.

लिस्टिंग के बाद उस कंपनी के शेयरधारक अपने शेयर उस स्टॉक एक्सचेंज पर बेच सकते है तथा उस शेयर को खरीदने के इच्छुक व्यक्ति उस शेयर को उसी स्टॉक एक्सचेंज से खरीद सकते हैं. जब किसी कंपनी का शेयर आसानी से बिकने या खरीदने के लिए उपलब्ध रहता है तो उसे कंपनी की शेयरों की liquidity लिक्विडिटी अथवा तरलता कहा जाता है किसी भी शेयर की वास्तविक बाजार कीमत उसके फेस वैल्यू से अधिक अथवा कम हो सकती है और यह कीमत शेयर की मांग और पूर्ति पर निर्भर करती है. यह शेयर बाजार का साधारणता नियम है कि  जिस शेयर की मांग अधिक होती है उसकी कीमत बढ़ती है और जिस शेयर की मांग नहीं होती है उसे शेयर होल्डर बेचना चाहते है तो उस शेयर की कीमत घट जाती है.

जो व्यक्ति अथवा व्यत्क्तियों का समूह किसी कंपनी को शुरू करने की योजना बनाते है उन्हें प्रमोटर कहा जाता है. प्रमोटर एक हिस्सा उन शेयरों में अपने पास रखते है और बाकी हिस्सा पब्लिक को पेश किया जाता है. जो हिस्सा प्रमोटरों के पास रहता है आमतौर पर वह हिस्सा शेयर मार्केट में ट्रेड होने के लिए नहीं आता. शेयर मार्केट में वही हिस्सा ट्रेड होता है जो पब्लिक के पास होता है.

 

डे ट्रेडिंग में शेयर को खरीदने अथवा बेचने के बाद उसी दिन सौदे को वापस कर दिया जाता है. यानी कि यदि कोई डे ट्रेडर यह सोच कर की आज Reliance इंडस्ट्रीज का शेयर बढ़ने वाला है मार्केट में ट्रेडिंग के शुरुआत में उसे खरीद लेता है और मार्केट बंद होने से पहले ही वापस बेच देता है तो उसे डे ट्रेडिंग कहेंगे.

 

जरूरी नहीं है की हर सौदे में आपको प्रॉफिट ही हो इसलिए जब भी निवेश करें लंबी अवधि के बारे में सोच कर ही निवेश करें और अपने फैसले पर विश्वास रखें. हर तीन से छः महीने में अपने पोर्टफोलियो का आकलन जरूर कर लें.

यह पाठ उनके लिए है जिनके लिए शेयर मार्किट एक दम अबूझ है और नहीं जानते कि शेयर क्या होते हैं ऐसे हो लोगों को यहाँ Shares in Hindi समझाने की कोशिश की गयी है.

 

शेयर बाजार के अलावा मैं आपको यहाँ हिंदी में बताऊंगा निवेश और म्यूच्यूअल फण्ड के बारे में भी. इसके आलावा जानिये टैक्स बचाने के तरीके. साथ ही पैसा बचाने के तरीके और फाइनेंस जगत की तमाम छोटी बड़ी जानकारियाँ हिंदी में.

यह ब्लाग होगा डम्मीस के लिये। यहां जानिये कैसे आप इन्फोसिस, रिलायन्स या एयरटेल में हिस्सेदार बन सकते हैं। क्या होते हैं राईट और बोनस शेयर।

कैसे पढ़ें कंपनियों के तिमाही, छमाही और वार्षिक नतीजे क्या होता है EPS और क्या होता है PE रेश्यो  और इसका शेयर की कीमत पर क्या असर होता है।

साथ ही जानिये कि किस तरह निवेश को डाइवर्सिफाई करके निवेश के रिस्क को कम किया जा सकता है. निवेश के लिए कंपनी कैसे चुन सकते हैं. किस तरीके से निवेश को डाइवर्सिफाई कर सकते हैं. लार्ज कैप, मिड कैप और स्माल कैप कम्पनियों में निवेश का क्या नजरिया होना चाहिए. हेजिंग क्या है और इससे शेयर बाजार में निवेश के रिस्क को कैसे कम किया जाता है. फ्यूचर और ऑप्शन्स क्या हैं यह भी समझने की कोशिश करेंगे.

शेयरों की फेस वैल्यू और बुक वैल्यू में क्या फर्क है? शेयर कैसे खरीदे जाते हैंम्यूचुअल फंड कितने प्रकार के होते हैं. ETF क्या होता है? NAV क्या होता है और इसकी गणना कैसे करते हैं? सेंसेक्स और निफ्टी क्या होते हैं और इनकी गणना कैसी की जाती है.  इसी प्रकार के अनगिनत तकनीकि पहलुओं की जानकारी लीजिये यहां।

                               

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Share Bazar Tips शेयर बाजार टिप्स

Share Bazar Tips in Hindi शेयर बाजार टिप्स शेयर बाजार में शुरुआत कैसे करें और कैसे सुरक्षित लाभ कमा सकते हैं. हिंदी में जानिये.
Share Bazar Tips
शेयर बाजार टिप्स शेयर बाजार में निवेश पर हम आपको अक्सर टिप्स देते रहते हैं. शेयरों में निवेश के लिये हमारे पहले टिप्स पढ़ने के लिये क्लिक करें। यहाँ आज आपको शेयर बाजार में निवेश पर कुछ और टिप्स दे रहे हैं.
हमें विश्वास है कि यदि आप इनका ध्यान रखेंगे तो शेयर बाजार में आपको कभी घाटा नहीं होगा और अवश्य ही आप यहाँ अच्छा ख़ासा मुनाफा कमा कर जायेंगे.

लंबी अवधि के लिये है शेयर बाजार : छोटी अवधि में शेयर बाजार भावनाओं पर चलता है। बाजार के अनुकूल अथवा प्रतिकूल समाचार बाजार के घटाव बढ़ाव को प्रभावित करते हैं। मगर लंबी अवधि में अर्थव्यवस्था का असर बाजार पर अवश्य ही आयेगा। यदि कोई कंपनी आर्थिक प्रगति कर रही है तो देर सवेर उसका असर उसके बाजार भावों पर अवश्य ही पड़ेगा।

यदि आपके पास कुछ पैसा निवेश के लिये उपलब्ध है मगर केवल छह माह के लिये तो बाजार में ना लगा कर उसे डेब्ट म्यूच्यूअल फण्ड में ही लगायें। बाजार में निवेश कम से कम तीन वर्ष के लिये करें।

शुरुआत म्यूचल फंड से: शुरू में म्यूचल फंड में निवेश करें और वह भी SIP के द्वारा। इससे आपको रोज रोज ना तो बाजार पर नजर रखनी पड़ेगी और न ही स्वंय को अधिक समय बाजार में देना पड़ेगा। बस विषेशज्ञों पर भरोसा करें और अपने निवेश को बढ़ते हुए देखें।

Diversify डाइवर्सिफाई यानी विविधिकरण : आपने यह कहावत तो सुनी ही होगी कि कभी भी अपने सभी अंडे एक ही टोकरी में नहीं रखने चाहियें. जब भी निवेश करें एक ही कंपनी में अपना सारा निवेश कभी मत करें. कम से कम चार कम्पनियां चुनें और वह भी अलग अलग उद्योगों से. इसी प्रकार लार्ज कैप, मिड कैप और स्माल कैप कंपनियों में भी डाइवर्सिफाई किया जा सकता है.

सारा पैसा शेयर बाजार में सीधे निवेश ना करके कुछ निवेश म्यूच्यूअल फण्ड के जरिये भी करें. म्यूच्यूअल फण्ड में भी निवेश को डाइवर्सिफाई करने की सुविधा रहती है. इसके अलावा सोने और फिक्स्ड डिपाजिट जैसे सुरक्षित निवेश के माध्यमों में भी कुछ राशि निवेशित रखें. अपने निवेश को कैसे डाइवर्सिफाई करें और निवेश का कितना हिस्सा किस तरह निवेश करें यह आपके आयु, आय की क्षमता, निवेश का उद्देश्य और रिस्क लेने की क्षमता पर निर्भर करता है.

कंपनी को जानिये: जिस कंपनी में निवेश करना चाहते हैं उस कंपनी को जानिये। उसके उत्पादो को समझिये। कई बार लोग दूसरों के दिये टिप्स पर किसी भी कंपनी में निवेश कर देते हैं बिना यह जाने कि कंपनी करती क्या है। कंपनी के काम काज को समझिये।

जिस उद्योग में कंपनी है उस उद्योग में कंपनी का योगदान किस प्रकार है।   उदाहरण के लिये तेल उत्पादक कंपनियां और तेल वितरक कंपनियां । मोबाइल उत्पादक कंपनियां, मोबाइल वितरक कंपनियां, मोबाइल टावर मैन्टेनस कम्पनियाँ और मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनियां। उदहारण के लिए भारती एयरटेल मोबाइल सेवा प्रदाता कंपनी है और भारती इन्फ्राटेल मोबाइल टावर का निर्माण और मैन्टेनस करती है.

शेयर बाजार में निवेश Investment in Shares

शेयर बाजार में निवेश Investment in Shares यदि आपको शेयर बाजार के बारे में कम जानकारी है अथवा आप इस बाजार के नये खिलाड़ी हैं या आप चाहते तो हैं कि बाजार में निवेश करें मगर जानते नहीं कि क्या करें और कैसे करें तो आज हम आपको कुछ टिप्स देते हैं. कुछ और  शेयर बाजार टिप्स Share Bazar Tips  यहाँ हैं. शेयर बाजार में हर कोई पैसा कमाना चाहता है मगर कई बार दोस्तों, रिश्तेदारों और साथ काम करने वालों कि देखा देखी निवेश करके लोग फँस जाते हैं. जब भी शेयर बाजार में निवेश करें तो अपनी समझ के साथ करें और जानलें कि उसमें कितना जोखिम हो सकता है.

 

टिप्स से दूर रहें: आप भी कहेंगे कि यह क्या घालमेल है। साथ ही कह रहे हैं कि मैं आपको टिप्स देता हूं और साथ ही कह रहें हैं कि टिप्स से दूर रहें। वास्तव में मैं आपको किन कंपनियों के शेयरों में निवेश करें ऐसे टिप्स नहीं देने वाला। यहां मैं आपको यह बता रहा हूं कि कैसे शेयर बाजार में निवेश करें। तो सबसे पहली बात मित्रों, रिश्तेदारों और ब्रोकरों के बताये टिप्स पर अथवा बाजार मैं फैली अफवाहों के आधार पर निवेश न करें। यह बहुत ही खतरनाक हो सकता है।

                         

 

स्वयं को शिक्षित करें: बैलेंश शीट तथा कंपनियों के नतीजों को पढ़ना और समझना सीखें।  यदि आपकी शिक्षा कॉमर्स स्ट्रीम से नहीं है तो थोड़ा और अधिक सावधान रहें। बाजार के बारे में अधिक से अधिक जानकारी एकत्र करें। नियमित रूप से इक्नॉमिक टाइम्स जैसे समाचार पत्र पड़ें और CNBC आवाज जैसे चैनल देखें।

जानकारियां एकत्रित करें : इसके अलावा इंटरनेट पर निवेश संबधी जानकारियां एकत्रित करें। जब आपको बाजार के बारे में आत्मविश्वास जागने लगे तो भी निवेश करने से पहले दो तीन कंपनियों को चुन लें जहां आपको लगे कि निवेश करना सही रहेगा। उसके बाद उन कंपनियों के भावों पर नियमित नजर रखें। कम से कम एक महीना अपनी इन कंपनियों पर नजर रखें। यदि लगे कि आपका चुनाव सही था तो आप बाजार में जाने के बारे में सोच सकते हैं।

शुरुआत कम पूंजी से करें: शुरुआत में नाम मात्र का निवेश करें और अनुभव प्राप्त  करें। एकदम से बड़ी रकम दांव पर न लागायें। वैसे भी बाजार में एक साथ बड़ा निवेश करने से बचना चाहिये और अपनी पूँजी का एक एक हिस्सा नियमित रूप से निवेश करना चाहिये।

अपने रिस्क को समझें : यदि आप नए खिलाडी हैं तो अपने रिस्क को समझें. जब हम कार चलाना सीख रहे होते हैं तो टक्कर होने का खतरा भी रहता है. शुरू के निवेश के फैसले गलत भी हो सकते हैं. बाजार में कभी कभी सुनामी भी आती है. बाजार की सुनामी में अच्छे अच्छे शेयर भी बह जाते हैं. बड़े से बड़े जानकार और अनुभवी लोग भी यहाँ घाटा खा सकते हैं. निवेश से पहले अपने रिस्क सहने की क्षमता का आकलन अवश्य करें.

 

इनकम टैक्स रेट Income Tax Rates Financial Year 2017-18

नये इनकम टैक्स रेट New Income Tax Rates
वित्त मंत्री ने आम आदमी को नये बजट में आज आय कर में राहत दी गयी है। आईये देखें कि किस प्रकार से यह राहत हम और आप पर असर करेगी। New IT Slabs / Income Tax Rates for Individuals Financial Year 2017-18, Assessment Year 2018-19
वित्त मंत्री ने 2.5 लाख से 5 लाख के स्लैब में इनकम टैक्स 10% से घटा कर 5% कर दिया है. इसी के साथ धारा 87A के तहत मौजूदा छूट (वर्तमान में 5 लाख रुपये की आय के तक) 3.5 लाख रुपये से 2.5 लाख रुपये के बीच की कमाई वाले व्यक्तियों के लिए मौजूदा 5000 रुपये से कम करके 2500 रुपये करने का प्रस्ताव है। नए प्रस्ताव से तीन लाख रुपये तक की आय पर देय इनकम टैक्स जीरो हो जाएगा. धारा 80C में दिए गए प्रावधान के अनुसार 1.5 लाख निवेश करने पर 4.5 लाख तक की आय पर देय इनकम टैक्स जीरो होगा.

साठ साल से कम आयु के लिए Income Tax Rates

इनकम टैक्स स्लैब

इनकम टैक्स रेट्स

रु 2,50,000 से कम आय

शून्य

कुल आय रु 2,0,000 से ज्यादा मगर रु 5,00,000 से कम

रु. 2,50,000 से अधिक जितनी आय है उस पर 5%

कुल आय रु 5,00,000 से ज्यादा मगर रु 10,00,000 से कम

रु. 5,00,000 से अधिक जितनी आय है उस पर 20%

कुल आय रु 10,00,000 से जादा

रु. 10,00,000 से जितनी अधिक आय है उस पर 30 %

सरचार्ज 50 लाख से 1 करोड़ तक की आय पर 10% सरचार्ज  और 1 करोड़ से अधिक की आय पर 15% सरचार्ज लगेगा.

 

साठ साल से अधिक और अस्सी साल से कम आयु के लिए Income Tax Rates

इनकम टैक्स स्लैब

इनकम टैक्स रेट्स

रु 3,00,000 से कम आय

शून्य

कुल आय रु 3,00,000 से ज्यादा मगर रु 5,00,000 से कम

रु. 3,00,000 से अधिक जितनी आय है उस पर 5%

कुल आय रु 5,00,000 से ज्यादा मगर रु 10,00,000 से कम

रु. 5,00,000 से अधिक जितनी आय है उस पर 20%

कुल आय रु 10,00,000 से जादा

रु. 10,00,000 से जितनी अधिक आय है उस पर 30 %

सरचार्ज 50 लाख से 1 करोड़ तक की आय पर 10% सरचार्ज और 1 करोड़ से अधिक की आय पर 15% सरचार्ज लगेगा.

अस्सी साल से अधिक आयु के लिए Income Tax Rates

इनकम टैक्स स्लैब

इनकम टैक्स रेट्स

रु 5,00,000 से कम आय

शून्य

कुल आय रु 5,00,000 से ज्यादा मगर रु 10,00,000 से कम

रु. 5,00,000 से अधिक जितनी आय है उस पर 20%

कुल आय रु 10,00,000 से जादा

रु. 10,00,000 से जितनी अधिक आय है उस पर 30 %

सरचार्ज 50 लाख से 1 करोड़ तक की आय पर 10% सरचार्ज और 1 करोड़ से अधिक की आय पर 15% सरचार्ज लगेगा.

 

 

SIP में निवेश से एक करोड़ कैसे बनायें SIP Investment

SIP में निवेश से एक करोड़ कैसे बनायें SIP Investment यानि SIP में निवेश आपको किस प्रकार करोड़पति बना सकता है. साफ़ तौर पर आपको कितना बचत करना है, कहाँ निवेश करना है और कितना रिटर्न मिल सकता है हिंदी में विस्तार से जानकारी कि SIP में निवेश से एक करोड़ कैसे बनायें. यह तो सब समझते हैं कि अमीर बनने के लिए आपको अपनी आमदनी से कम खर्चा करना है और बचत करना है और उस बचत को सही जगह पर निवेश करना है. मगर हमें यह भी स्पष्ट होना चाहिए कि अपने उद्देश्य को प्राप्त करने के लिए हमें कितनी बचत करनी है और कहाँ निवेश करना है.

यदि आपको मालूम है कि आपको अपने उद्देश की पूर्ती के लिए कितना पैसा चाहिए तो आज आपको बता रहे हैं कि आपको कितना निवेश करना चाहिए और कहाँ निवेश करना चाहिए. यदि आप ने एक निश्चित पूँजी प्राप्त करने का उद्देश्य हासिल करना है तो यहाँ आपको बता रहे हैं कि अगले पचीस वर्षों में आप इसे कैसे प्राप्त कर सकते हैं. यदि आप अपने निवेश से एक करोड़ रुपये प्राप्त करना चाहते हैं तो यहाँ दिए गए टेबल में देख सकते हैं कि कितनी राशी प्रति माह जमा करने के बाद एक निश्चित ब्याज या रिटर्न पर आप कब एक करोड़ रुपये प्राप्त कर सकते हैं.

एक करोड़ से ऊपर की राशी नीले रंग में दिखाई गयी है.

यहाँ आपको बता दें कि यदि मान लीजिये कि आपका उद्देश्य एक करोड़ रुपये की पूँजी बनाना है तो मुद्रास्फीति यानी महंगाई का ध्यान रखें. यानि जो चीज आप आज एक करोड़ में प्राप्त कर सकते हैं वही चीज आप पचीस साल बाद बढ़ती महंगाई के कारण एक करोड़ में प्राप्त नहीं कर सकेंगे. इसी लिए जब आप अपना लक्ष्य निर्धारित करें तो उसमें महंगाई से होने वाली क्षति की भी गणना कर लें. इसीलिए मैंने इस टेबल में एक करोड़ से भी ज्यादा के लक्ष्य को प्राप्त करने के आंकड़े भी लिए हैं.

कैसे करें बचत

जो लक्ष्य आपने चुना है उसी अनुसार आपकी मासिक बचत भी होनी चाहिए. यदि आप उतनी मासिक बचत नहीं कर पा रहे हैं तो इसके लिए साधारण सा नियम है कि या तो अपनी आय बढ़ाएं या अपने खर्चे कम करें जिससे आप एक निश्चित राशी हर माह बचा सकें.

या फिर अपनी बचत को ऐसी जगह निवेश करें जहां आपको अधिक रिटर्न मिल सके.

 

एक करोड़ का लक्ष प्राप्त करने के लिए कैसे और कहाँ निवेश करें

अब सवाल उठता है कि अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए कहाँ और कैसे निवेश करें. हर माह एक निश्चित राशी निवेश करने को कहते हैं SIP यानी Systematic Investment Plan मतलब एक पद्धतिबद्ध निवेश योजना.


अब आप यह निश्चित राशि हर माह म्यूचुअल फण्ड में भी कर सकते है, बैंक RD (Recurring Deposit) या पोस्ट ऑफिस RD में भी कर सकते हैं.

अपना मनवांछित रिटर्न पाने के लिए कहाँ निवेश करें?

अपने निवेश पर अधिक रिटर्न प्राप्त करने के लिए आपको अधिक रिस्क भी उठाना होगा. आप अपना लक्ष प्राप्त करने के लिए अपने निवेश को अलग अलग जगह पर भी निवेश कर सकते हैं. इससे कम रिस्क में अधिक रिटर्न प्राप्त किया जा सकता है. जैसे कि हर माह केवल इक्विटी म्यूचुअल फण्ड में निवेश ना करके आधा निवेश डेट फण्ड में और आधा निवेश इक्विटी फण्ड में कर सकते हैं. यहाँ आपको बता रहे हैं कि आप कहाँ निवेश करके कैसा रिटर्न प्राप्त कर सकते हैं.

8 से 11%

बैंक RD
पोस्ट ऑफिस RD
PF यानि Provident Fund
डेट फण्ड
बैलेंस्ड फण्ड
ETF इन निवेशों को अधिक सुरक्षित माना जाता है और रिटर्न के लिए सुनिश्चित रहा जा सकता है.

12 से 18% शेयर बाजार
इक्विटी फण्ड
डाइवर्सिफाइड इक्विटी फण्ड
बैलेंस्ड फण्ड
ETF
इन निवेशों में रिस्क भी सम्मिलित मान सकते हैं मगर यदि आप पचीस वर्षों तक निवेश कर रहे हैं और SIP द्वारा निवेश कर रहे हैं तो आपका रिस्क न्यूनतम हो जाता है.

आदर्श निवेश वही होगा जो ऊपर दी गयी दोनों श्रेणियों में बाँट कर किया जाए.

तो इस लेख को पढ़ कर आप अपने निवेश और बचत के उद्देश्यों को समझने में अधिक स्पष्ट हो गए होंगे. अब आपको पता है कि अपना लक्ष्य प्राप्त करने के लिए आपको कितना और कहाँ निवेश करना है. अब आपको SIP Investment द्वारा SIP में निवेश से एक करोड़ कैसे बनायें यह बहुत आसान लग रहा होगा.

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पैनी स्टॉक्स Penny Stocks क्या होते हैं

पैनी स्टॉक्स Penny Stocks क्या होते हैंपैनी स्टॉक्स Penny Stocks में निवेश करें या नहीं और यह क्यों कुछ निवेशकों की पहली पसंद हैं, आपको इनमें फंसना चाहिए या बच कर रहना चाहिए, हिंदी में विस्तार से. पैनी स्टॉक्स Penny Stocks आम तौर पर उन शेयरों को कहा जाता है जो शेयर बाजार में बहुत ही कम कीमतों पर उपलब्ध होते हैं. इनका नाम शायद पैनी स्टॉक्स Penny Stocks इस लिए पड़ा होगा क्योंकि अमेरिका में एक डॉलर से कम कीमत पर उपलब्ध शेयरों को पैनी स्टॉक कहते हैं. भारत में दस रुपये से कम कीमत पर ट्रेड होने वाले शेयरों को पैनी स्टॉक्स Penny Stocks कह सकते हैं. इन्हें हिंदी में चवन्नी शेयर भी कहते हैं.                              

पैनी स्टॉक्स Penny Stocks क्या होते हैं

जैसा कि हमने बताया पैनी स्टॉक्स Penny Stocks बहुत ही कम कीमत पर ट्रेड होने वाले शेयर होते हैं. यह शेयर आमतौर पर छोटी कंपनियों के होते हैं जिनकी पूँजी बहुत ही कम होती है, अधिक बड़ी टर्नओवर भी नहीं होती है और अधिकतर ये कम्पनियां घाटे में चलती हैं या बहुत ही कम प्रॉफिट पर चलती हैं. ऐसे शेयरों में कंपनी के प्रमोटर  या उनके प्रतिनिधि ही अधिकतर ट्रेडिंग में लगे रहते हैं. झूठी या सच्ची खबरें छपवा कर इन शेयरों के दाम बढ़ा दिए जाते हैं.   यह शेयर बहुत ही कम वॉल्यूम में ट्रेड होते हैं इसीलिए कह सकते हैं कि इन शेयरों में लिक्विडिटी की समस्या रहती है. कम कीमत के कारण कई बार निवेशक इन में फंस जाता है मगर किसी के कहने पर ऐसे शेयरों में निवेश करना जोखिम से भरा होता है.

पैनी स्टॉक्स Penny Stocks में निवेश करें या नहीं

पैनी स्टॉक्स Penny Stocks क्योंकि बहुत कम कीमत पर मिलते हैं तो फिर इन में निवेश करने की इच्छा निवेशकों में रहती है. इनकी कम समय में कीमत बढ़ने की संभावना भी अधिक रहती है. कोई शेयर कम समय में अधिक रिटर्न भी दे सकता है.

उदाहरन के लिए  कोई शेयर आप दो रुपये में खरीदतें हैं और वह शेयर यदि तीन रुपये का भी हो जाता है तो समझ लीजिये आपका निवेश पचास प्रतिशत बढ़ जाता है. मगर ऐसी ट्रेडिंग में जोखिम बहुत हैं. अकसर कीमत बढ़ने पर ट्रेडर तो मौके पर ऐसे शेयरों से निकल जाते हैं मगर कीमतें फिर वापिस आ जातीं हैं और निवेशक हाथ मलता रह जाते है. कभी कभी पैनी स्टॉक्स Penny Stocks में कोई टर्नअराउंड शेयर भी मिल सकता है यानी ऐसे शेयर जो कि घाटे से लाभ की और जा रहे हैं. यदि वास्तव में आप ऐसे किसी शेयर को पहचान कर निवेश करते हैं तो यह एक अच्छा निवेश भी साबित हो सकता है.

 

ऐसी कंपनी जिसका पिछला इतिहास अच्छा रहा हो और कुछ ख़ास परिस्थितियों के कारण घाटे में चली गयी हो मगर कंपनी के माल की बाज़ार में मांग हो, बड़ी कैपिटल और अच्छी सेल हो तो निवेश करने का जोखिम कम रहता है. कई बार बड़ा लोन लेने के बाद कई कम्पनियां ब्याज के बोझ से घाटे में चली जातीं हैं. कुछ समय बाद लिए गए लोन से अपने उत्पादों का विस्तार करके कंपनी की फिर से प्रॉफिट में आने की संभावना होने लगती है.  ऐसी कंपनियों के शेयर को टर्नअराउंड शेयर कह सकते हैं.

यदि आप नए निवेशक हैं और शेयर बाजार के नए खिलाडी हैं तो पैनी स्टॉक्स Penny Stocks या चवन्नी शेयरों से दूर ही रहें. यदि आप पुराने और जानकार निवेशक हैं तो टर्नअराउंड शेयरों की पहचान करके ही निवेश करें. अपने कुल पोर्टफोलियो का एक छोटा सा हिस्सा ही इनमें लगायें क्योंकि इनमें जोखिम बहुत होता है.

Inflation in Hindi मुद्रास्फीति

Inflation in Hindi  यानी मुद्रास्फीति को परिभाषित करना आसान नहीं है. Inflation यानी मुद्रास्फीति का शाब्दिक अर्थ है मुद्रा का फैलना. तकनीकी परिभाषा में ना जाकर इसको आसान भाषा में समझने की कोशिश करते हैं. मुद्रास्फीति का अर्थ इसी में छिपा है. मुद्रा यानी करेंसी और स्फीति यानी बढ़ना, फूलना या फैलना. यानी जब किसी अर्थव्यवस्था में लोगों के पास खरीदने के लिए मुद्रा बढ़ जाती है तो उस अर्थव्यवस्था में मुद्रास्फीति का बढ़ना कहा जाएगा. यानि जब वस्तुओं की मांग (Demand) बढ़ती है और उसी के अनुसार वस्तुओं की पूर्ती (Supply) नहीं बढ़ती है तो उस स्थिती को  मुद्रास्फीति का बढ़ना कहा जाएगा.

मुद्रास्फीति क्या है

आइये इसे आसान उदाहरण से समझते हैं. मान लीजिये एक अर्थव्यवस्था में सब लोगों के पास एक हजार रुपये हैं. वे इसी से एक दूसरे से सामान खरीदते और बेचते हैं. अब यदि इस अर्थव्यवस्था में किसी कारण से एक सौ रुपये और आ जाते हैं और अन्य परिस्थितियाँ नहीं बदलती हैं . अब इस अर्थव्यवस्था में कुल ग्यारह सौ रुपये हो गए. अब वह अतिरिक्त सौ रुपये जो लोगों की जेब में आ गए वे उसके लिए भी मांग (Demand) पैदा करेंगे. इसी मांग के अनुसार पूर्ती (Supply) नहीं बढ़ने के कारण वस्तुओं की कीमतें बढेंगी. इसी वस्तुओं को बढ़ने की गणना को मुद्रास्फीति कहा जाता है.

मुद्रास्फीति के कारण

मुख्य रूप से मुद्रास्फीति के दो कारण हो सकते  हैं.

मांग जन्य मुद्रास्फीति: जब लोगों के पास खर्च करने के लिए अधिक पैसा हो जाता है और वस्तुओं की मांग बढ़ जाते है तो उसके फलस्वरूप बढ़ी कीमतें.

  • सरकारी खर्चों में वृद्धि : सरकार द्वारा गैर योजना व्यय में वृद्धि से जनता के हाथों में व्यय करने के लिए अधिक धन आ जाता है जिससे मांग में वृद्धि होती है.
  • सरकार द्वारा घाटे का बजट :  घाटे के बजट की पूर्ती जब सरकार द्वारा नयी मुद्रा छाप कर की जाती है तो ऐसे में मांग में वृद्धि मुद्रास्फीति को बढ़ाती है.
  • सरकार द्वारा प्रत्यक्ष करों में कमी: यदि सरकार प्रत्यक्ष करों में कमी करती है तो भी लोगों के पास खर्च के लिए हाथ में अधिक धन आ जाता है. यह भी मांग को बढाता है.
  • बैंकों द्वारा ऋण : यदि बैंकों द्वारा दिए जाने वाले ऋण में वृद्धि होती है तो भी मांग में वृद्धि होने लगाती है.

पूर्ती में कमी के कारण मुद्रास्फीति: जब सामान्य वस्तुओं की पूर्ती में प्राकृतिक या जानबूझ कर कमी पैदा हो जाती है तो यह मुद्रास्फीति के बढ़ने का कारण बनती है.

  • जमाखोरी : उत्पादन में उतार चढाव के कारण व्यापारियों को जमाखोरी का अवसर मिल जाता है जिसे वस्तुओं की पूर्ती  में नकली कमी पैदा की जाती है.
  • प्राकृतिक आपदा : बाढ़ अथवा सूखे के कारण कृषि उत्पादों की पूर्ती में कमी आ सकती है.
  • लागत में बढ़ोतरी : वस्तुओं के कच्चे माल, मजदूरी की कीमतों में बढ़ोतरी, अधिक टैक्स या ब्याज में बढ़ोतरी जैसी चीजें भी पूर्ती में बाधा उत्पन्न कर सकती है.
मुद्रास्फीति कैसे गिनते हैं

इसे भी आसानी से समझते हैं. मान लीजिये आज से ठीक एक साल पहले आपने एक कमीज सौ रुपये में खरीदी. आज यदि उस कमीज की कीमत एक सौ पांच रुपये हो गयी है तो उस कमीज के लिए मुद्रा स्फीति पांच प्रतिशत बढ़ गयी. भारत में मुद्रास्फीती का नापने के लिए दो मूल्य सूचकाँक है थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index) तथा औद्योगिक श्रमिक हेतु उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (Consumer Price Index). इन सूचकांको की गणना के लिए आम जरूरत की लगभग सभी वस्तुओं की कीमत को लिया जाता है जिनमें शामिल हैं भोज्य पदार्थ, खनिज, बिजली, इंधन, यातायात, चमड़ा, कागज़, लकड़ी, रबर जैसी सैंकड़ों वस्तुओं की कीमतें. जरुरी सामान की लिस्ट को समय के अनुसार  बदला भी जाता है. उदहारण के लिए टाइपराइटर और वीसीआर जैसी वस्तुओं को हटा कर माइक्रोवेव ओवेन, मिनरल वाटर, कंप्यूटर, फ्रिज, डिश ऐन्टेना जैसी वस्तुओं को शामिल करना.

आम तौर पर मुद्रास्फीति की हालत का प्रभाव गरीब और आय पेशा लोगों पर अधिक पड़ता है. मुद्रास्फीति की हालत में आपके द्वारा किया गया निवेश यदि आपको मुद्रास्फीति की दर से अधिक रिटर्न नहीं देता है तो आपको अपने निवेश में वास्तव में घाटा ही हुआ है.

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डीमैट क्या है Demat in Hindi

Demat in Hindi डीमैट क्या है, कैसे काम करता है, डीमैट की आवश्यकता क्यों पड़ती है और इसके क्या क्या फायदे हैं विस्तार से हिंदी में जानिये.
डीमैट क्या है Demat in Hindi इसको आसानी से ऐसे समझिये. जैसे हम आपने पैसे अपने बैंक के खाते में रखते हैं वैसे ही हम अपने शेयर डीमैट खाते में रखते हैं. जैसे हम यदि बैंक के खाते से नकदी निकलवा लें तो वह नकदी या करंसी पैसे का भौतिक रूप है. मगर जब हम अपने डेबिट कार्ड से किसी दूकानदार को पेमेंट करते हैं तो यह पैसों का इलेक्ट्रॉनिक ट्रान्सफर हुआ. इसी प्रकार यदि हमारे पास शेयर हैं तो हम या तो उन्हें किसी को गिफ्ट देंगे या बाजार में बेच देंगे, दोनों ही परिस्थितियों में शेयरों का एक डीमैट खाते से दूसरे डीमैट खाते में इलेक्ट्रॉनिक ट्रान्सफर किया जाएगा. शेयरों को भौतिक रूप में रखने की आवश्यकता ही नहीं पड़ती.

                                        

भारत में शेयर और प्रतिभूतियां को इलेक्ट्रॉनिक रूप से Dematerialized डिमैटीरिलाईज्ड यानी डीमैट खातों में रखा जाता है. शेयर धारक शेयरों को भौतिक रूप में यानी कागज़ पर छपे हुए शेयर सर्टिफिकेट नहीं रखते. इसके लिए ब्रोकर के पास जा कर डीमैट खाता खुलवाया जाता है. सभी शेयरों के लेनदेन में डीमैट खाते का नंबर लिखा जाता है जिससे कि शेयरों की खरीद बिक्री का इलेक्ट्रॉनिक सेटलमेंट हो सके. किसी भी तरह के शेयरों के लेनदेन के लिए शेयर होल्डर के पास डीमैट खाता होना आवश्यक है.

डीमैट खाते तक पहुँचने के लिए इन्टरनेट पर पासवर्ड की जरूरत होती है. शेयरों की खरीद और बिक्री सौदा कन्फर्म होने पर स्वत ही हो जाती है.

जब भी कोई कंपनी बोनस अथवा राईट शेयर जाती कराती है तो ये शेयर भी सीधे शेयर होल्डर के डीमैट खाते में आ जाते हैं. आईपीओ IPO में शेयरों के आवेदन करने के लिए भी डीमैट खाते की आवश्यकता है. यदि आईपीओ में आपको शेयर मिले हैं तो वे सीधे आपके डीमैट खाते में ही आ जाते हैं.

Demat के फायदे

डीमैट शेयर गुम नहीं होते, खराब नहीं हो सकते, चोरी नहीं हो सकते. इनसे सिग्नेचर ना मिलने जैसी समस्या भी नहीं होती. डीमैट खातों की वजह से शेयरों की खरीद बिक्री में धोखा होने की संभावना भी समाप्त हो जाती है. यह बहुत ही सुविधाजनक भी है.

आप अपना डीमैट खाता किसी दूसरे को ट्रान्सफर नहीं कर सकते मगर इसमें पड़े शेयर दूसरे को ट्रान्सफर कर सकते हैं. डीमैट खाता किसी दूसरे के साथ जॉइंट तरीके से खुलवाया जा सकता है. आप एक से अधिक डीमैट खाते भी खोल सकते हैं. अधिकतर निजी बैंक आपको डीमैट खाता खुलवाने की सुविधा देते हैं. इसके अलावा कई निजी ब्रोकर कंपनियों के पास डीमैट खाता खुलवाया जा सकता है. इसके लिए आपको अपना पैन कार्ड की कॉपी, पते का प्रूफ देना होता है और KYC भरना पड़ता है.

KYC क्या है

बैंक में खाता खोलना हो, फिक्स्ड डिपाजिट बनवाना हो, म्यूच्यूअल फण्ड खरीदना हो या बीमा लेना हो, आपसे KYC फॉर्म भरवाया जाता है. KYC क्या है और इसे क्यों भरवाया जाता है हिंदी में विस्तार से जानिये.
KYC  यानि Know your customer को साधारण हिंदी में कहेंगे अपने ग्राहक को जानिये. बैंक तथा वित्तीय कम्पनियाँ इस फॉर्म को भरवा कर इसके साथ कुछ पहचान के प्रमाण भी लेतीं हैं जिसके जरिये वे अपने ग्राहक की पहचान की पुष्टि करते हैं. केवाईसी अपने ग्राहकों की पहचान की पुष्टि के लिए एक व्यापार की प्रक्रिया है. भारतीय रिज़र्व बैंक के द्वारा बैंकों के लिए ग्राहकों से केवाईसी भरवाना अनिवार्य किया गया है.

 

सोने में निवेश Gold ETF

बाजार में पुराने तरीके से सोना खरीदने के बदले Gold ETF गोल्ड ईटीएफ में निवेश करने से हो सकते हैं बहुत से लाभ. Detail of Gold ETF in Hindi.
सोने में निवेश Gold ETF गोल्ड ईटीएफ :  हमारे देश में सोने में निवेश को बहुत पसंद किया जाता है. चाहे पढ़े लिखे नौकरीपेशा को ऑफिस में बोनस मिले या किसान की फसल से आय हो. निवेश के लिए सोने को ही चुना जाता है. सोने को हमेशा एक रिस्क फ्री निवेश माना जाता है. अक्सर परिवारों में सोना पीढ़ी दर पीढ़ी उपहार स्वरुप चलता रहता है और कभी बेचा नहीं जाता. मगर जब भी परिवार पर कोई विपदा आती है तो आढ़े वक्त पर यही  सोना काम भी आता है.

                                                               

पारंपरिक तरीके से सुनार के यहाँ से सोना खरीदने का एक आधुनिक विकल्प है Gold ETF गोल्ड ईटीएफ. ETF यानी  Exchange Traded Fund एक्सचेंज ट्रेडेड फण्ड.

Gold ETF गोल्ड ईटीएफ एक फण्ड होता है जो कि निवेशकों के लिए उनके पैसे का सोने में निवेश करता है. आप Gold ETF गोल्ड ईटीएफ में दस ग्राम, एक ग्राम या आधा ग्राम में भी निवेश कर सकते है. सोने के दाम के साथ साथ Gold ETF गोल्ड ईटीएफ के दाम भी घटते बढ़ते जाते हैं. इसे आप अपने ब्रोकर या म्यूचुअल फंड हाउस से खरीद सकते हैं.

आपके द्वारा खरीदे हुए Gold ETF गोल्ड ईटीएफ यूनिट आपके डीमैट खाते में जमा होते हैं. जब भी इन्हें भुनाना हो तो आप अपने गोल्ड ईटीएफ की कीमत के बराबर नकदी ले सकते हैं. कुछ Gold ETF गोल्ड ईटीएफ स्कीम्स में आपको मैच्योरिटी के समय बराबर कीमत का सोना लेने का विकल्प भी मिल सकता है.

Gold ETF गोल्ड ईटीएफ के फायदे

खरीदने में आसानगोल्ड ईटीएफ को आप घर बैठे ऑनलाइन भी खरीद सकते है, आपको गोल्ड खरीदने के लिए सुनार के पास जाने की आवश्यकता नहीं है.

रखने में आसान : गोल्ड ईटीएफ आपके डीमैट एकाउंट में पड़ा रहता है और इसके गुम या चोरी होने का कोई रिस्क नही है. सोने के रख रखाव का कोई झंझट नहीं रहता है.

 

बहुत कम चार्जेज : फिजिकल गोल्ड के मुकाबले इलेक्ट्रोनिक गोल्ड खरीदने और बेचने में बहुत कम चार्जेज लगते हैं जबकि फिजिकल गोल्ड खरीदने और बेचने में  ज्यादा चार्जेज लगते हैं.

शुद्धता की गारंटी : फिजिकल गोल्ड खरीदने में शुद्धता की गारंटी मिलना मुश्किल हो जाता है जबकि इलेक्ट्रॉनिक गोल्ड फिजिकल नहीं होता तो उसमें मिलावट की कोई आशंका ही नहीं होती.

SIP की सुविधा : यदि आप भारी मात्रा में एक साथ सोना नहीं खरीद सकते तो Gold ETF गोल्ड ईटीएफ के जरिए हर माह एक निश्चित राशि में गोल्ड खरीद सकते हैं इससे SIP कहते हैं. इस प्रकार आप एक या आधा ग्राम सोना प्रति माह भी खरीद सकते हैं. मासिक आय वालों के लिए सोने में निवेश का यह बेहतरीन तरीका है.

कम मात्रा में खरीद :  गोल्ड ईटीएफ आप एक ग्राम अथवा आधा ग्राम के यूनिट में भी खरीद सकते हैं. मगर फिजिकल गोल्ड कम मात्रा में लेकर एकत्र करना असुविधाजनक हो सकता है.

तो सोने में निवेश करना है तो  Gold ETF गोल्ड ईटीएफ में निवेश का आधुनिक तरीका अपनाइए और उसे डीमैट खाते में रख निश्चिन्त हो जाइए.

 

 

फेस वैल्यू क्या है Face Value in Hindi

फेस वैल्यू क्या है Face Value in Hindi शेयरों के संदर्भ में यह जानना और समझना बहुत आवश्यक है कि फेस वैल्यू क्या है किसी शेयर की वैल्यूएशन अथवा बाजार भाव से इसका क्या सम्बन्ध है. यहाँ हम यह भी समझेंगे की किस तरह यदि शेयर स्प्लिट Split होता है तो इसका शेयर की फेस वैल्यू पर क्या असर पड़ता है और शेयर के स्प्लिट होने पर उसके बाजार भाव पर क्या असर पड़ सकता है. फेस वैल्यू Face Value यानी अंकित मूल्य शेयर की वास्तविक कीमत होती है जो कि शेयर प्रमाण पात्र पर अंकित रहती है. यदि अबस कंपनी की कुल शेयर पूँजी दो करोड़ रुपये है और वह दस रुपये प्रति शेयर के बीस लाख शेयर जारी करती है तो दस रुपये अबस कंपनी के शेयर की फेस वैल्यू यानी अंकित मूल्य होगी. फेस वैल्यू को पार वैल्यू Par Value या केवल पार भी कहते हैं.

                                                         

अब यदि अबस कंपनी का शेयर बाजार में सूचित Listed होने के बाद मांग बढ़ने के कारण शेयर बाजार में बढ़ कर रुपये 15 हो जाता है तो अब इसे प्रीमियम वैल्यू या अबव पार Above Par कहेंगे. और यदि शेयर की बाजार कीमत घट कर आठ रुपये रह जाती है तो इसे डिस्काउंट वैल्यू Discount Value या बिलो पार Below Par  कहेंगे. दस रुपये के शेयर की कीमत यदि बाजार में भी दस रुपये ही है तो इसे एट पार At Par कहेंगे.

अक्सर शेयर खरीदते समय खरीददार शेयर की फेस वैल्यू चैक नहीं करते. ध्यान दीजिये की यदि ए कंपनी का एक रुपये फेस वैल्यू का शेयर बीस रुपये में बिक रहा है और बी कंपनी का दस रुपये फेस वैल्यू का शेयर बीस रुपये में बिक रहा है तो इसका क्या मतलब होगा? इसका मतलब यह होगा कि ए कंपनी का शेयर अपनी फेस वैल्यू से बीस गुना कीमत पर बिक रहा है और बी कंपनी का शेयर अपनी फेस वैल्यू से दो गुना कीमत पर बिक रहा है. यानि ए कंपनी का शेयर बी कंपनी के मुकाबले अधिक प्रीमियम पर बिक रहा है.

 

कंपनी अपने शेयर की फेस वैल्यू को बदल भी सकती है. कम्पनियां अपने शेयर को स्प्लिट Split यानी विभाजित कर उसके फेस वैल्यू को बदल सकती है. कल्पना कीजिये की यदि आपके पास अबस कंपनी के दस रुपये फेस वैल्यू के सौ शेयर हैं और उनका बाजार भाव पचास रुपये प्रति शेयर है. कंपनी अपने शेयरों को स्प्लिट करके उनकी फेस वैल्यू को पांच रुपये प्रति शेयर कर देती है. ऐसी स्थिती में कम्पनी आपके दस रुपये फेस वैल्यू वाले सौ शेयरों को पांच रुपये फेस वैल्यू के दो सौ शेयरों में परिवर्तित कर देगी. अब आपके शेयर का बाजार भाव भी कम हो कर पच्चीस रुपये प्रति शेयर के आस पास  हो जाने की संभावना है. अधिकतर स्प्लिट होने के बाद शेयरों का बाजार भाव उसी अनुपात में नहीं घटता जिस अनुपात में फेस वाले घटती है. इसीलिए संभावना है की इस उदहारण में स्प्लिट होने के बाद शेयर की बाजार कीमत पच्चीस रुपये से अधिक होगी.  अक्सर कम्पनियाँ अपने शेयरों की बाजार में कीमत बहुत अधिक हो जाने पर शेयरों को स्प्लिट करतीं हैं जिससे उनके शेयरों की कीमत छोटे निवेशकों की पहुँच में रहे और वे इन शेयरों में निवेश कर सकें.

फेस वैल्यू क्या है Face Value in Hindi और इसका क्या महत्व है  यह मैंने यहाँ आसान हिंदी में समझाने की कोशिश की है.

ETF क्या है ETF in Hindi

ETF क्या है ETF in Hindi? ETF यानी  Exchange Traded Fund एक्सचेंज ट्रेडेड फण्ड वास्तव में इंडेक्स फण्ड होते हैं जो कि स्टॉक एक्सचेंज में शेयरों की तरह ही ख़रीदे और बेचे जाते हैं. विश्व भर में ETF यानी  Exchange Traded Fund एक्सचेंज ट्रेडेड फण्ड रिटेल निवेशकों और संस्थागत निवेशकों में बहुत ही लोकप्रिय निवेश का साधन है. हम यह कह सकते हैं कि यह एक सस्ता निवेश का साधन है क्योंकि इस फण्ड में चार्जेज आम तौर पर  दुसरे फंड्स के मुकाबले कम होते हैं. आप इन्हें अपने ब्रोकर से अथवा सीधे फण्ड हाउस से भी खरीद सकते हैं.  जहां म्यूच्यूअल फण्ड दिन के आखिर में NAV पर लिए जाते हैं, ETF ट्रेडिंग के घंटों में ही उस समय के  ट्रेडिंग के वास्तविक कीमतों पर ख़रीदे और बेचे जा सकते हैं. यानि ETF में डे ट्रेडिंग भी संभव है.

 

          

ETF  की संरचना: ETF की संरचना अपने इंडेक्स पर ही आधारित होती है. उदाहरन के लिए निफ्टी या सेंसेक्स इंडेक्स.

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सेंसेक्स क्या है?

निफ्टी क्या है?

सेंसेक्स ETF में सेंसेक्स में शामिल 30 शेयरों में उनके मार्किट कैपिटल के अनुसार वैसे ही निवेश किया जाता जैसे उनका सेंसेक्स में महत्त्व है.  इसी प्रकार निफ्टी ETF में भी होता है. इसी प्रकार उद्योग आधारित इंडेक्स जैसे फार्मा इंडेक्स, बैंकिंग इंडेक्स या मिड कैप, स्माल कैप इंडेक्स अथवा कमोडिटी आधारित ETF जैसे गोल्ड ETF हो सकते हैं.

ETF के फायदे :  खरीदने बेचने में आसान. क्योंकि स्टॉक एक्सचेंज इंडेक्स (सेंसेक्स या निफ्टी आदि) में शामिल शेयर अलग अलग उधोगों से शामिल किये जाते हैं, इंडेक्स ETF में विविधिता आ जाती है जिससे निवेश के रिस्क में कमी हो जाती है. ETF सुविधाजनक हैं, आप सेंसेक्स के तीस और निफ्टी के पचास शेयरों में एक साथ निवेश कर सकते हैं. उसी प्रकार आप वास्तविक गोल्ड या सोना ना खरीद कर उसका ETF खरीद सकते हैं जो की

अधिक सुविधाजनक है.  ETF में कम राशि से निवेश की जा सकती है. आप ETF में SIP भी ले सकते हैं.

SIP क्या है

यहाँ हमने ETF क्या है ETF in Hindi सरल भाषा में समझाने की कोशिश की है फिर भी यदि आपका इससे सम्बंधित कोई प्रशन है तो टिप्पणी में पूछ सकते हैं, मैं जवाब देने की कोशिश करूंगा.

सेंसेक्स क्या है Sensex in Hindi

सेंसेक्स क्या है Sensex in Hindi और इसे कैसे गिनते हैं, इसका स्टॉक मार्किट में क्या महत्त्व होता है आसान हिंदी में विस्तार से जानिये.
सेंसेक्स क्या है Sensex in Hindi और इसे कैसे गिनते हैं? जब आप शेयर बाजार Share Market में निवेश करने के बारे में सोचते हैं या उसके बारे में जानना चाहते हैं तो सबसे पहले यही सवाल सामने आता है कि यह सेंसेक्स Sensex क्या होता है और इसका शेयर बाजार Share Market में क्या महत्त्व है? Sensex in Hindi – Sensex, Sensitive Index  यानि संवेदी सूचकांक का संक्षिप्त रूप है. मुम्बई स्टाक एक्सचेंज Mumbai Stock Exchange का संवेदी सूचकांक जिसे संक्षेप में बीएसई 30 (BSE 30) या बीएसई सेंसेक्स (BSE Sensex)  भी कहा जाता हैवहां के सर्वोच्च 30 शेयरों पर आधारित है।


यदि आप शेयर बाजार की जानकारी लेना चाहते हैं तो यह जानना बहुत आवश्यक है कि सेंसेक्स क्या है और इसे कैसे गिना जाता है. कोशिश करूँगा कि सेंसेक्स क्या है और इसे कैसे गिनते हैं इसकी जानकारी आपको आसान हिंदी में दूं. यहां आपको यह बता दें कि यह 30 शेयरों की सूची समय समय पर बदलती रहती है तथा मुम्बई शेयर बाजार आवश्यक्ता के अनुसार इस सूची में बदलाव करता रहता है मगर सूचकांक में कुल शेयरों की संख्या तीस ही रहती है।

                     Sensex in Hindi सेंसेक्स

एस एंड पी बीएसई सेंसेक्स (एस एंड पी बंबई स्टॉक एक्सचेंज का संवेदी सूचकांक), मुम्बई शेयर बाजार में सूचीबद्ध 30  स्थापित और आर्थिक रूप से मजबूत कंपनियों के एक मुक्त फ्लोट बाजार भारित शेयर बाजार सूचकांक (free-float market-weighted stock market index) है।  BSE में से सबसे बड़े और सबसे सक्रिय रूप से कारोबार करने वाले  शेयरों में से ऐसी  30 कंपनियों को लिया जाता है जो कि भारतीय अर्थव्यवस्था के विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों का प्रतिनिधित्व करती हैं।

1 जनवरी 1986 के बाद से प्रकाशित, एस एंड पी बीएसई सेंसेक्स भारत में घरेलू शेयर बाजारों की नाड़ी के रूप में माना जाता है। एस एंड पी बीएसई सेंसेक्स का आधार मूल्य 1 अप्रैल 1979 के दिन से 100 के रूप में लिया और 1978-1979 इसका आधार वर्ष है।

यहां आपको यह बता दें कि यह 30 शेयरों की सूची समय समय पर बदलती रहती है तथा बीएसई आवश्यक्ता के अनुसार इस सूची में बदलाव करता रहता है मगर सूचकांक में कुल शेयरों की संख्या तीस ही रहती है।

कैसे गिनते हैं सेंसेक्स :

जैसे कि मैनें बताया कि सेंसेक्स free-float market-weighted stock market index है. फ्री फ्लोट का आसान हिंदी में अर्थ होगा तैरने के लिए आजाद. किसी भी कंपनी के बाजार पूंजीकरण Market Capitalization का वह हिस्सा जो बिकने के लिए बाजार में उपलब्ध हो सकता है  वह फ्री फ्लोट बाजार पूँजी होगी और उसी के आधार पर सेंसेक्स की गणना की जाती है. आम तौर पर प्रमोटरों का हिस्सा अथवा सरकार का हिस्सा पूँजी में से निकाल दें तो बाकी बची पूँजी बाजार में बिकने के लिए उपलब्ध हो सकती है.

Market Capitalization अथवा बाजार पूंजीकरण क्या है?

इसे Market Cap या बाजार पूँजी भी कह सकते हैं. इसे कंपनी द्वारा कुल जारी शेयरों की संख्या को प्रति शेयर बाजार भाव से गुना करके प्राप्त किया जा सकता है.  यदि एक कंपनी ने  दस दस रुपये कीमत के एक लाख शेयर जारी किये हैं तो कंपनी की पूँजी हुई दस लाख रुपये. अब यदि इस कंपनी के एक शेयर की बाजार में कीमत साठ रु है तो कंपनी की Market Cap या बाजार पूँजी साठ लाख होगी.

                                   बाजार पूँजी = कुल बकाया शेयर X प्रति शेयर बाजार भाव

       1,00,000 X रु 60 = रु 60,00,000

अब यदि इस कंपनी में प्रमोटरों का हिस्सा 40 %  है और पब्लिक का हिस्सा 60%  है तो इस कंपनी में फ्री फ्लोट फैक्टर होगा 0.6 .  यानि इंडेक्स की गणना के लिए इस कंपनी के बाजार पूँजी का 60%  हिस्से का ही असर माना जाएगा.

इस प्रकार से पूरे इंडेक्स का free float market capitalization निकाला जाता है और उसे इंडेक्स विभाजक (index divisor) से विभाजित कर दिया जाता है. यह इंडेक्स विभाजक 1978-1979 के आधार वर्ष की बाजार पूँजी में हुई बढ़त पर आधारित होता है.

मान लीजिये आधार वर्ष में बाजार पूँजी थी 50000 और जिस दिन का इंडेक्स गिनना है उस दिन की बाजार पूँजी है 12000000 है तो इंडेक्स विभाजक होगा 100/50000 और इंडेक्स की गणना होगी 12000000 x 100/50000 = 24000.

यह मेरी कोशिश थी Sensex in Hindi में समझाने की.  उम्मीद है कि आपको समझ आ गया होगा कि सेंसेक्स क्या है और इसे कैसे गिनते हैं. यदि आपको सेंसेक्स के बारे में कुछ जानकारी होगी तो शेयर बाजार Share Market के काम को समझने में आसानी होगी.

                  NIFTY in Hindi निफ्टी क्या है

NIFTY in Hindi, निफ्टी क्या है? निफ्टी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का सूचकांक है. निफ्टी क्या है और इसे कैसे गिनते हैं इस बारे में हिंदी में लेख.
NIFTY in Hindi, निफ्टी क्या है और इसे कैसे गिनते हैं? निफ्टी नेशनल  स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध 50 प्रमुख शेयरों का सूचकांक है. निफ्टी दो शब्दों को मिला कर बना है NATIONAL और FIFTY. इससे यह प्रतीत होता है कि निफ्टी शब्द नेशनल स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध सर्वोच्च पचास शेयरों पर आधारित है. निफ्टी की चाल से आपको बाजार की चाल का हाल मालूम हो जाता है. यदि निफ्टी में तेजी है तो आप मान सकते हैं कि बाजार में भी तेजी है. यदि निफ्टी में गिरावट है तो आप मान सकते हैं कि बाजार में भी गिरावट है.  हालाँकि निफ्टी केवल पचास शेयरों की कीमत के आधार पर ही गिना जाता है फिर भी निफ्टी की दिशा बाजार की दिशा का  भी संकेत देती है.

                                                          

BSE तथा NSE भारत के प्रमुख शेयर बाजार हैं जहां शेयरों की ट्रेडिंग होती है. सेंसेक्स तथा निफ्टी इनके प्रमुख सूचकांक हैं.

हमने अपनी पिछली पोस्ट Sensex in Hindi में आपको बताया था की सेंसेक्स क्या है और इसे कैसे गिनाते हैं. सेंसेक्स क्योंकि 30 शेयरों पर आधारित है और निफ्टी 50 शेयरों पर आधारित है तो हम कह सकते हैं की निफ्टी बाजार की चाल का व्यापक तरीके से प्रतिनिधित्व करता है. यह पचास शेयर 22 अलग अलग उद्योगों से लिए गए हैं.

सेंसेक्स की ही तरह निफ्टी भी मुक्त फ्लोट बाजार भारित शेयर बाजार सूचकांक (free-float market-weighted stock market index) है. किसी भी कंपनी के बाजार पूंजीकरण Market Capitalization का वह हिस्सा जो बिकने के लिए बाजार में उपलब्ध हो सकता है  वह फ्री फ्लोट बाजार पूँजी होगी और उसी के आधार पर निफ्टी की भी गणना की जाती है.

मुक्त फ्लोट बाजार भारित शेयर बाजार सूचकांक (free-float market-weighted stock market index)  में इंडेक्स की कैसे गणना की जाती है गणना का पूरा तरीका आप Sensex in Hindi पर देख सकते हैं. निफ्टी का आधार वर्ष 1995 है और आधार अंक 1000 है. इस सूचकांक की गणना 3 नवम्बर 1995 से की जाती है और इस दिन सूचकांक का आधार 1000 माना गया है.

आज यदि निफ्टी का मूल्य 8000 के करीब है, तो इसका मतलब यह है कि निफ्टी के शेयरों की कीमत  1995 के मुकाबले अब तक 800% तक बढ़ चुकी है.

                             पैसा बचाने के तरीके

पैसा बचाने के तरीके : शेयर बाजार अथवा फिक्स्ड डिपाजिट या और कहीं निवेश करने से पहले बचत करना जरूरी है. Before investing in Share Market, Fixed Deposit or somewhere else you need to save first.
पैसा बचाने के तरीके आज कल सबसे बड़ी चुनौतीयों में से एक है अपने खर्चों पर नियंत्रण पाना और भविष्य के लिए पैसे बचाना. यदि आप बचत Save करेंगे तभी तो निवेश Invest कर पायेंगे. यहाँ हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं जिनसे आप खर्चालू इंसान से बचत करने वाला इंसान बन सकते हैं. आप एक अच्छा जॉब या व्यवसाय कर रहे हैं, मोटा वेतन कमाते है और आपका उज्जवल भविष्य है। फिर भी क्या इस में से कोई भी बात आपकी बचत से परिलक्षित होती है? अधिकतर युवा लोगों को अपने करियर के शुरुआती वर्षों में पैसे बचाने में बहुत कठिनाई आती है। इन तरीकों को अपना कर आप भी कम खर्च करके अधिक से अधिक बचत कर सकते हैं.


खर्च से पहले बचत Save before spending

अधितर लोग अपनी आय से सभी खर्चों को निकाल कर जो शेष बच जाए उतनी ही बचत करते हैं. मशहूर निवेशक वॉरेन बफेट Well known investor Warren Buffett ने कहा है पहले बचत करें, और जो बच जाए उतना ही खर्च करें. महीने के शुरू में अपनी बचत करलें, उसके बाद जो बचे उतना ही खर्च करें.

दिखावा करने से पहले इंतज़ार करें Wait before showing off

जब आप कुछ भी नया और महँगा खरीदना चाहतें हैं तो रुकें. क्या आपको वाकई इसकी आवश्यकता है? कहीं आप दिखावा करने के लिए कुछ महँगा तो नहीं खरीद रहे हैं? आईफोन की जरूरत है तभी आईफोन खरीदें. केवल इस लिए कि आपके मित्र ने आईफोन खरीदा है आप भी आईफोन ना ले आयें. कुछ भी महंगा खरीदने से पहले अपने निर्णय को तीस दिनों के लिए टाल दें. तीस दिन बाद देखें की क्या अभी भी आप उस महँगी वस्तू के बिना नहीं रह सकते? जिसकी जरूरत आपको तीस दिन तक नहीं पड़ी, मुमकिन है आपको उसकी जरूरत है ही नहीं.

क्रेडिट कार्ड का प्रयोग कम करें Don’t Use Credit Cardजब हम कैश में पेमेंट करते हैं तो पैसा अपने बटुए से निकलता है, इस तरह से पैसा निकलते हुए पैसे के खर्च होने का एहसास होता है. कार्ड से पेमेंट करते हैं तो यह अहसास नहीं होता. जब भी बाजार खरीददारी के लिए जाएँ, अपना बजट निश्चित करें, उतना ही नकद अपनी जेब में रखें. क्रेडिट कार्ड या डेबिट कार्ड घर पर ही छोड़ दें.

छोटी बचत से शुरू करें Start with Small Saving

कैरियर की शुरुआत में जब आय कम ही होती है बचत करनी कठिन होता है. फिर भी थोड़ा थोड़ा अवश्य बचाएं. धीरे धीरे इसे बढाते जाएँ. लम्बी अवधि तक जमा कम पैसा भी ब्याज के साथ बड़ा होने लगता है. पैसा बचाने के तरीके छोटे छोटे ही होते है मगर नतीजे बड़े भी हो सकते हैं.

बजट बनाएं Have Budget

महीने के शुरू में ही अपना बजट बना लें. बिना हिसाब किताब के यूं ही खर्च ना करें. बजट बना होगा तो आपको पता रहेगा कि कहां कहां खर्च करना है, इससे बिना बजट के खर्चे बच जायेंगे. अपने बजट पर कायम रहें और परिवार को भी इसे पालन करने के लिए कहें. हो सके तो बजट बनाने में परिवार को भी साथ रखें. यदि सभी मिल कर निर्णय लेंगे तो सभी उस निर्णय पर कायम भी रहेंगे.

यह कोई जरूरी नहीं है कि बचत करने के लिए आप इन्तजार करते रहें कि जब मेरी आय बढ़ेगी तो ही बचत करूंगा. आप खुद ही सोचिये, कोई व्यक्ति यदि तीस हजार रुपये कमा कर तीस हजार ही महीने के अंत में खर्च कर देता है, और दूसरा व्यक्ति यदि बीस हजार रुपये कमा कर हर महीने दस हजार रुपये बचा लेता है तो महीने के आखिर में कौन ज्यादा अमीर है? अब एक ऐसे व्यक्ति की कल्पना कीजिए जो तीस हजार रुपये कमा कर पैंतीस हजार रुपये खर्च देता है. आप कह सकते हैं कि मैं हमेशा सीमा में ही खर्च करता हूँ मगर कभी यदि कोई आपातकालीन जरूरत हुई या कोई बीमारी हुई तो खर्च आपकी आय से ज्यादा जा सकता है.

यदि यह पैसा बचाने के तरीके आप अपने जीवन के शुरुआत में ही अपना लेते हैं तो रिटायरमेंट के समय तक आप के पास बहुत ही बड़ी रकम होगी जिससे आप अपना शेष जीवन आराम से गुजार सकते हैं

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Balance Sheet in Hindi बैलेंस शीट क्या होती है?

Balance Sheet in Hindi बैलेंस शीट क्या होती है? यदि आप शेयर बाजार Share Market में निवेश करने जा रहे हैं तो इसे समझना बहुत आवश्यक है. ना सिर्फ यह जानना आवश्यक है कि बैलेंस शीट क्या होती है, अपितु यह भी जान लेना चाहिए कि इसे कैसे पढ़ा जाता है और किसी भी कंपनी  की बैलेंस शीट देख कर उस कंपनी की सेहत का कैसे पता लगाया जाए. शेयर बाजार Share Market में निवेश करने वालों के लिए यह आवश्यक है कि उन्हें Balance Sheet बैलेंस शीट के बारे में पता हो और यह भी ज्ञान हो कि उसे पढ़ते कैसे हैं. यदि आप भी शेयर बाजार Share Market में निवेश करना चाहते हैं तो Stock Exchange में लिस्टेड किन्हीं पांच कंपनियों की Balance Sheet बैलेंस शीट प्राप्त कीजिये और उन्हें स्टडी कीजिये. जब तक आप को यह आत्म विश्वास ना हो जाए कि आप को Balance Sheet बैलेंस शीट की अच्छी तरह से समझा आ गयी है तब तक आप शेयर बाजार Share Market में निवेश करने से बचें.

यहाँ हम आपको हिंदी में बताएँगे कि बैलेंस शीट क्या होती है? बैलेंस शीटको हिंदी में तुलन पत्र या चिट्ठा भी कहते हैं. मगर हम यहाँ बैलेंस शीट शब्द का ही प्रयोग करेंगे क्योकि यही प्रचलित है. आज के पाठ में बहुत से तकनीकी शब्द आयेंगे मगर मैं कोशिश करूंगा की इसे आसान हिंदी में समझाया जा सके.

एक दिए गए समय पर एक व्यापार या संगठन की संपत्ति, देनदारियों, और पूँजी (Share Capital) के  विवरण को बैलेंस शीट कहते हैं। आम तौर पर इसे कंपनी या संगठन के वित्तीय वर्ष के अंत में जारी किया जाता है. बैलेंस शीट को Profit and Loss Account यानी लाभ हानि खाते के बाद तैयार किया जाता है. बैलेंस शीट में मुख्य रूप से निम्न घटक होते हैं : Balance Sheet in Hindi बैलेंस शीट क्या होती है

 

Current Assets चालू परिसंपत्तियां : मुख्य रूप से नगदी, बैंक  बैलंस, एडवांस, कच्चा माल जैसे मद इसमें आते हैं.

Investments निवेश : कंपनी द्वारा किये गए किसी भी तरह के निवेश.

Property, Plant and Equipment प्रॉपर्टी, प्लांट तथा इक्विपमेंट :  इन्हें Fixed Assets फिक्स्ड एसेट्स भी कहते हैं. भूमि, भवन, मशीनें, ऑफिस इक्विपमेंट, गाड़ियां फर्नीचर आदि इस मद में गिने जाते हैं. इन्हें Tangible Assets भी कहते हैं. इसका हिंदी अर्थ होगा मूर्त संपत्ति यानी ऐसी संपत्ति जिसे देख छु सकते हैं.

Intangible Assets अमूर्त संपत्तियां: ऐसी संपत्ति जिसे देख छू नहीं सकते. कंपनी की गुडविल या साख कंपनी की Intangible Assets अमूर्त संपत्तियां है. इसके अलावा Copyrights कॉपीराइट, Patents पेटेंट,  Trademarks ट्रेडमार्क्स, Brand names ब्रांड, Domain names डोमेन का नाम भी  Intangible Assets अमूर्त संपत्तियों के उदाहरण हैं. यहाँ आपको बता दें कि अक्सर कम्पनियां बैलेंस शीट में Intangible Assets अमूर्त संपत्तियां अपनी सही कीमत पर नहीं दिखा पातीं. आप ही बताइए गूगल, फेसबुक और फ्लिप्कार्ट के जमाने में आप इन Intangible Assets अमूर्त संपत्तियों की सही वैल्यू कैसे लगा सकते हैं?

Current Liabilities चालू देनदारियां : अधिकतर इस मद में वह खर्चे और देनदारियां होती हैं जो बैलेंस शीट बनाने की तारीख को देय हो चुके हैं. जैसे वेतन, मजदूरियाँ, देय इनकम टैक्स, देय ब्याज आदि.

Long Term Liabilities लम्बी अवधि की देनदारियां : लम्बी अवधि के ॠण, Bond  बॉंड आदि इस मद में होंगे.

यहाँ आपको बता दें कि बैलेंस शीट में हमेशा संपत्तियों और देनदारियों (शेयर पूँजी मिला कर) का टोटल बराबर ही होगा.

मैंने यहाँ कोशिश की है की आसान हिंदी में Balance Sheet in Hindi बैलेंस शीट क्या होती है, समझाया जा सके. इसे कैसे पढ़ा जाता है और किसी भी कंपनी  की बैलेंस शीट देख कर उस कंपनी की सेहत का कैसे पता लगाया जाए यह अगले किसी लेख में दिया जाएगा. आपको यह लेख कैसा लगा टिपण्णी करके जरूर बताएं.

                          

 

 

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PE Ratio in Hindi पी ई रेश्यो क्या है?

PE Ratio in Hindi पी ई रेश्यो क्या है? शेयर बाजार में किस शेयर में निवेश करें यह जानने के लिए सबसे कारगर टूल है पी ई रेश्यो. To learn how to select a share to invest PE Ratio is the most efficient tool.
PE Ratio in Hindi : Price Earning Ratio  पी ई रेश्यो यानी मूल्य आय अनुपात. किसी शेयर का  PE Ratio यानी मूल्य आय अनुपात जान कर बहुत आसानी से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि शेयर की कीमतों में बढ़ोतरी की कितनी संभावना है. इसी प्रकार पूरे बाजार का PE Ratio देख कर आप बाजार के बढ़ने की संभावनाओं का अंदाजा भी लगा सकते हैं. किसी एक उद्योग या वर्ग के शेयरों का PE Ratio देख कर भी आप यह अंदाजा लगा सकते हैं की उनमें बढ़ने की संभावना है या नहीं.

 

PE Ratio in Hindi:
PE Ratio संकेत मात्र है और निवेश का फैसला करने में सहयोगी हैं मगर जब भी निवेश करें तो कंपनी, उसके उद्योग तथा बाजार के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद ही निवेश करें.

इसी प्रकार दो शेयरों, दो उद्योगों, दो देशों के बाजारों अथवा दो वर्गों के शेयरों के बाजार भाव की तुलना करनी हो तो PE Ratio एक बहुत ही काम का टूल है. एक ही शेयर या उद्योग या बाजार की कीमतों की तुलना उनके ऐतिहासिक मूल्यों और अनुपात से भी की जाती है. इससे यह पता चलता है की कोई शेयर या बाजार पहले कितने मूल्य अनुपात तक बढ़ा या गिरा है.

PE Ratio केवल लाभ देने वाले शेयर के लिए ही गिन सकते हैं. जब आय ही नहीं हो तो मूल्य आय अनुपात नहीं निकाल सकते. आसान भाषा में समझें तो PE Ratio यह जानने का तरीका है कि कंपनी की आय का जो हिस्सा प्रति शेयर को प्राप्त होगा उसके अनुपात में शेयर की बाजार में कीमत क्या है. PE Ratio जानने के लिए सबसे पहले गिनते हैं EPS यानि प्रति शेयर आय. उसके बाद एक शेयर की कीमत से EPS को विभाजित करके PE Ratio निकाल सकते हैं.

पी ई रेश्यो =शेयर की बाजार में कीमत/प्रति शेयर आय

PE Ratio = Merket Price / EPS

अब इसे एक उदहारण से समझते हैं. मान लीजिये अबस कंपनी के दस रुपये मूल्य के 100000 शेयर हैं. कंपनी की वार्षिक आय है रुपये 2,00,000. अब शेयर का EPS होगा 2,00,000/100000 = रु 2. अब यदि शेयर का बाजार में मूल्य रु 18 है तो शेयर का PE Ratio होगा:

 

PE Ratio = 18/2 =9.

अब हम इस PE Ratio का उपयोग कैसे करेंगे? अबस कंपनी के शेयर के मूल्य का इतिहास देखिये. इसका अधिकतम PE Ratio कितना रहा है? इसी प्रकार अबस कंपनी जिस उद्योग में है उसका औसत PE Ratio कितना है? पूरे बाजार का औसत PE Ratio कितना है? इन सब तुलनाओं से यह अंदाज लगाना आसान हो जाता ही कि अबस कंपनी के शेयर की वर्तमान कीमत में बढ़ने या घटने की कितनी संभावना है.

यहाँ यह स्पष्ट कर दूं कि PE Ratio संकेत मात्र है और निवेश का फैसला करने में सहयोगी हैं मगर जब भी निवेश करें तो कंपनी, उसके उद्योग तथा बाजार के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद ही निवेश करें.

उम्मीद है कि साधारण हिंदी में लिखा PE Ratio in Hindi आपको समझ आया होगा. शेयरों में निवेश करना जुआ नहीं है, यह एक कला और विज्ञान है. जो इसे सीख लेगा वह अवश्य यहाँ कमाई करेगा.

Investing in Shares is not gambling , it is an art and a science . One who will learn here will Surely earn.

EPS in Hindi कैसे गिनें प्रति शेयर आय

What is EPS in Hindi and how to calculate EPS Earning Per Share in Hindi कैसे गिनें प्रति शेयर आय जानना बहुत जरूरी है किसी भी कंपनी में निवेश करने से पहले. Earning Per Share (EPS) यानि प्रति शेयर आय कैसे गिनी जाती है और इससे कंपनी की आर्थिक सेहत को कैसे जाना जाता है, आज इसके बारे में विचार करते हैं। कंपनी की सेहत कैसी है यह जानने के लिए ईपीएस एक महत्वपूर्ण टूल है और जब हमें ईपीएस पता हो तो हम PE रेश्यो आसानी से निकाल सकते हैं.

 

कंपनी की कुल शुद्ध लाभ से हर शेयर के हिस्से में कितनी रकम आयेगी उसे ही Earning per Share प्रति शेयर आय  कहते हैं।  इसे गिनेंगे

 

शुद्ध लाभ / कुल शेयरों की संख्या

यदि 10 करोड़ रु की पूंजी वाली कंपनी जिसके 10 रु की कीमत वाले 1 करोड़ शेयर हों और वह कंपनी 20 करोड़ रुपये का शुद्ध लाभ कमाती है तो उसकी प्रति शेयर आय 20 रुपये होगी:

20 करोड़ / 1 करोड़ = 20

यदि कोई कंपनी केवल तिमाही नतीजे  ही घोषित करती है तो उन नतीजों के आधार पर कंपनी के पूरे साल के प्रति शेयर आय की भी गणना की जा सकती है।

 

उपरोक्त उदाहरण में यदि कंपनी आने वाली तिमाही के लिये 6 करोड़ रु का शुद्ध लाभ घोषित करती है तो हम अंदाज लगा सकते हैं कि कंपनी की प्रति शेयर आय आने वाले साल में बढ़ कर 24 रु हो जायेगी। इसी प्रकार अर्धवार्षिक परिणामों को देख कर भी वार्षिक प्रति शेयर आय की भी गणना की जा सकती है।

इस बात का ध्यान रहे कि यदि कंपनी तेजी से विकास कर रही है या कंपनी का सीजनल काम है जो कि पूरे वर्ष एक सा नहीं रहता तो तिमाही नतीजों से वार्षिक प्रति शेयर आय की भविष्यवाणी गलत भी साबित हो सकती है।

एक बात और भी घ्यान देने लायक है कि यदि कंपनी ने वर्तमान तिमाही में कोई ऐसी बड़ी डील की है जिसके दोहराव की संभावना नहीं है तो उस डील से हुए लाभ या हानि समायोजित करके ही वार्षिक आय की गणना की जानी चाहिये।

ज्यादातर शेयरों की कीमतें चालू अथवा आने वाले साल के प्रति शेयर आय की संभावनाओं पर निर्भर करतीं हैं।

कोई भी शेयर बाजार में सस्ता है या मंहगा अथवा किसी शेयर की कीमतों में कितनी बढ़ौतरी की संभावनायें हैं इसे जानने का बहुत बड़ा मानक है प्रति शेयर आय EPS और प्रति शेयर कीमत अनुपात यानि PE Ratio. इसके बारे में अगली बार।

उम्मीद है कि Share Markets in Hindi की यह श्रृंखला आपको पसंद आ रही होगी। आप हमें टिप्पणी कर के बतायें कि Share Markets in Hindi में आगे आप और क्या पढ़ना और जानना चहते हैं।

 

PE Ratio in Hindi पी ई रेश्यो क्या है?

PE Ratio in Hindi पी ई रेश्यो क्या है? शेयर बाजार में किस शेयर में निवेश करें यह जानने के लिए सबसे कारगर टूल है पी ई रेश्यो. To learn how to select a share to invest PE Ratio is the most efficient tool.
PE Ratio in Hindi : Price Earning Ratio  पी ई रेश्यो यानी मूल्य आय अनुपात. किसी शेयर का  PE Ratio यानी मूल्य आय अनुपात जान कर बहुत आसानी से यह अंदाजा लगाया जा सकता है कि शेयर की कीमतों में बढ़ोतरी की कितनी संभावना है. इसी प्रकार पूरे बाजार का PE Ratio देख कर आप बाजार के बढ़ने की संभावनाओं का अंदाजा भी लगा सकते हैं. किसी एक उद्योग या वर्ग के शेयरों का PE Ratio देख कर भी आप यह अंदाजा लगा सकते हैं की उनमें बढ़ने की संभावना है या नहीं.

 

PE Ratio in Hindi:
PE Ratio संकेत मात्र है और निवेश का फैसला करने में सहयोगी हैं मगर जब भी निवेश करें तो कंपनी, उसके उद्योग तथा बाजार के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद ही निवेश करें.

इसी प्रकार दो शेयरों, दो उद्योगों, दो देशों के बाजारों अथवा दो वर्गों के शेयरों के बाजार भाव की तुलना करनी हो तो PE Ratio एक बहुत ही काम का टूल है. एक ही शेयर या उद्योग या बाजार की कीमतों की तुलना उनके ऐतिहासिक मूल्यों और अनुपात से भी की जाती है. इससे यह पता चलता है की कोई शेयर या बाजार पहले कितने मूल्य अनुपात तक बढ़ा या गिरा है.

PE Ratio केवल लाभ देने वाले शेयर के लिए ही गिन सकते हैं. जब आय ही नहीं हो तो मूल्य आय अनुपात नहीं निकाल सकते. आसान भाषा में समझें तो PE Ratio यह जानने का तरीका है कि कंपनी की आय का जो हिस्सा प्रति शेयर को प्राप्त होगा उसके अनुपात में शेयर की बाजार में कीमत क्या है. PE Ratio जानने के लिए सबसे पहले गिनते हैं EPS यानि प्रति शेयर आय. उसके बाद एक शेयर की कीमत से EPS को विभाजित करके PE Ratio निकाल सकते हैं.

पी ई रेश्यो =शेयर की बाजार में कीमत/प्रति शेयर आय

PE Ratio = Merket Price / EPS

अब इसे एक उदहारण से समझते हैं. मान लीजिये अबस कंपनी के दस रुपये मूल्य के 100000 शेयर हैं. कंपनी की वार्षिक आय है रुपये 2,00,000. अब शेयर का EPS होगा 2,00,000/100000 = रु 2. अब यदि शेयर का बाजार में मूल्य रु 18 है तो शेयर का PE Ratio होगा:

 

PE Ratio = 18/2 =9.

अब हम इस PE Ratio का उपयोग कैसे करेंगे? अबस कंपनी के शेयर के मूल्य का इतिहास देखिये. इसका अधिकतम PE Ratio कितना रहा है? इसी प्रकार अबस कंपनी जिस उद्योग में है उसका औसत PE Ratio कितना है? पूरे बाजार का औसत PE Ratio कितना है? इन सब तुलनाओं से यह अंदाज लगाना आसान हो जाता ही कि अबस कंपनी के शेयर की वर्तमान कीमत में बढ़ने या घटने की कितनी संभावना है.

यहाँ यह स्पष्ट कर दूं कि PE Ratio संकेत मात्र है और निवेश का फैसला करने में सहयोगी हैं मगर जब भी निवेश करें तो कंपनी, उसके उद्योग तथा बाजार के बारे में पूरी जानकारी लेने के बाद ही निवेश करें.

उम्मीद है कि साधारण हिंदी में लिखा PE Ratio in Hindi आपको समझ आया होगा. शेयरों में निवेश करना जुआ नहीं है, यह एक कला और विज्ञान है. जो इसे सीख लेगा वह अवश्य यहाँ कमाई करेगा.

निवेश में धोखे से कैसे बचें How to avoid investment frauds

निवेश में धोखे से कैसे बचें How to avoid investment frauds आज आपको कुछ साधारण किस्म के धोखों से बचने के उपायों के बारे में बताते हैं जो कि अक्सर आपके एजेंट Agents कर जाते हैं। निवेश और बीमा में अक्सर गुमराह करके प्लान बेच दिया जाता है. जानकारी के अभाव में अकसर एजेंट द्वारा जो बताया जाता है उसी पर ग्राहक विश्वास करा लेता है. यहाँ हम आपको निबेश में धोखे से बचने के कुछ उपाय बता रहे हैं जिससे कि आप जब निवेश करें तो सावधान रहें और धोखा ना खाएं.

 

मेरे एक मित्र ने निवेश Invest तो किया था म्युचुअल फंड Mutual Fund में मगर एजेंट Agent ने उन्हें यूलिप Ulip बेच दिया। कई बार ऐसा होता है कि एजेंट Agent सपने तो किसी और प्लान या प्रोडक्ट के दिखाते हैं मगर जब वास्तव में आपके पास निवेश के कागज पहुंचते हैं तो उसमें कुछ और ही निकलता है। कई निवेशक Investors तो आलस के कारण या जानकारी न होने के कारण प्राप्त कागजों को देखते भी नहीं कि उन्हें जो निवेश के कागजात मिले हैं उनमें सब कुछ सही है कि नहीं।

आपको हमने पहले भी इस बात के लिये आगाह किया था कि कैसे कुछ एजेंट Agent बड़े बड़े वादे करके कुछ भी बेच देते हैं। यह भी बताया था कि किस तरह से अपने एजेंट का चुनाव करें। इसके बाद जब आप कोई निवेश करते हैं निवेश के कागज़ प्राप्त होने के बाद क्या करना है आज हम आपको वही बताना चाहते हैं:

1. जिस स्कीम में निवेश किया था क्या यह वही है: बहुत जरूरी है यह जांचना कि आपने जिस स्कीम में देखभाल कर और अपनी जरूरत के हिसाब से निवेश किया था क्या प्राप्त कागजात उसी स्कीम में निवेश हुए हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि एजेंट ने अपनी कमीशन के चक्कर में आपको कोई ऐसा प्लान दे दिया हो जो आपकी जरूरतों के मुताबिक ही न हो। यहां म्युचुअल फंड और यूलिप (ULIP) में अंतर को समझना भी जरूरी है। म्युचुअल फंड Mutual Funds मध्यम समय (पांच से सात वर्ष) के लिये निवेश के लिये उत्तम हैं और यूलिप Ulip दस साल या उससे अधिक समय के लिये। यूलिप Ulip में पहले वर्ष में ज्यादा चार्जेस कटते हैं मगर लम्बी अवधी में यूलिप म्यूचल फंड से भी ज्यादा फायदेमंद साबित होता है।

2. बाकी जानकारी भी देखें : अच्छी तरह से देख लें कि आपका नाम, आपका पता, जन्म की तारीख, संपर्क नंबर, नामित व्यक्ति (nominee) का नाम जैसी जरूरी जानकारी सही से भरी है कि नहीं। याद रखें कि यदि आपने कभी कोई बीमा या यूलिप लिया है और इनमें से कोई जानकारी सही नहीं है तो क्लेम लेने में कई तरह की दिक्कतें भी आ सकती हैं। कुछ कंपनियां आपके द्वारा भेजे गये फार्म की कापी भी करवा कर आपको भेजतीं हैं उसे भी अच्छी तरह जांच लें कि आपके फार्म भरने के बद एजेंट ने उस में कोई बदलाव तो नहीं किये हैं।

3. प्लान के नियम व शर्तें: बहुत लंबी, उबाउ और कानूनी भाषा मे लिखे यह नियम व शर्तें जरूर पढ़ें। कुछ समझ न आये तो किसी जानकार से उसके बारे में जानने से परहेज न करें। अधिकतर कंपनियां कस्टमर्स केयर नंबर भी देतीं हैं वहां संपर्क करें या स्वंय कंपनी के कार्यालय/शाखा में जायें।

4. शुल्क तथा प्रभार: यह भी देख लें कि जैसा बताया गया था क्या शुल्क तथा प्रभार वैसे ही लगे हैं या ज्यादा लगे हैं। भविष्य में लगने वाले प्रभारों की भी जानकारी लें।

इस सब को देखने के बाद और सब कुछ सही पाने के बाद अपने कागजों को संभाल कर रखें। हो सके तो किसी प्लास्टिक की फाइल या फोल्डर में ही रखें। लकड़ी की अलमारी के बजाये लोहे की अलमारी में रखना ज्यादा सुरक्षित है। जहां भी रखें अपने घर के जिम्मेदार व्यक्तियों को अवश्य बतायें। अपने एजेंट का विजिटिंग कार्ड अपने निवेश के कागजों के साथ रखें जिससे कि समय असमय संपर्क करने में आसानी रहे।

अगली बार आपको बतायेंगे कि यदि आपको एजेंट आपको धोखा दे जाये तो उससे कैसे निबटें।

Bulls and Bears in Share Market शेयरबाजार में बैल और भालू

Bulls and Bears in Share Market शेयरबाजार और बैल और भालू क्या हैंमहाश्क्ति के प्रमेंद्र प्रताप सिंह ने यह सवाल मुझसे दो तीन बार पूछा था। हर बार यही सोचता कि अगले किसी लेख में इस बारे में लिखूंगा। आज फिर जब उन्हों ने यही प्रश्न उठाया तो ज्यादा इंतजार न करवाकर टाईम निकाल उनका जवाब दे रहा हूं। उनका प्रश्न था कि शेयर बाजार में बैल और भालू का क्‍या सम्‍बन्‍ध है? क्यों शेयर बाजार के समाचारों के साथ बैल और भालू को भी चित्रित किया जाता है?


शेयर बाजार की अपनी एक भाषा होती है। जो लोग यह सोचते हैं कि बाजार तेजी के रुख में रहेगा तो लाभ की आशा में वे और शेयर खरीदना चाहते हैं इसीलिये उन्हें तेजड़िये कहते हैं। जो सोचते हैं कि बाजार में कीमतें गिरेंगी वे शेयरों को बेचना चाहते हैं तो उन्हें कहते हैं मदड़िये। इन्ही तेजड़ियों को बाजार में बुल्स यानी बैल कहा जाता है तथा मंदड़ियों को बियर यानी भालू। इसी लिये जब भी बाजार में तेजी आती है तो अगले दिन सेंसेक्स के ग्राफ के साथ बैल को चित्रित किया जाता है और जब बाजार तेजी से गिरते हैं तो भालू का चित्र दिखाया जाता है। शेयर बाजार का सारा खेल शेयर खरीदने और बेचने वालों के बीच ही होता है. खरीदने वाला बुल यानि बैल और बेचने वाला बेयर यानी भालू.

मान्यता है कि यह नाम इस जानवरों के हमला करने के तरीके से पड़ा। जब भी बैल हमला करता है तो अपने शिकार को नीचे से उठा कर उछाल देता है जबकि भालू अपने शिकार को हमेशा पंजों से नीचे की ओर दबाता है। कुछ ऐसा ही व्यवहार बाजार में तेजड़िए और मदड़िये भी करते हैं. इसीलिए इन जानवरों से बाजार के  इन खिलाडियों की पहचान बनी.

जब शेयर बाजार में तेजी होती है और बाजार के सूचकांक ऊपर जा रहे होते हैं तो उसे बुल्लिश मार्किट कहते हैं. जब बाजार के सूचकांक गिर रहे होतें हैं तो उसे बेयरिश मार्किट कहते हैं. बैल जहां शक्ति का प्रतीक है वहीँ लापरवाही का भी प्रतीक है. बुल्लिश मार्किट में कमजोर शेयर भी अनाप शनाप में ऊंची ऊंची कीमतों तक पहुँच जाते हैं. बाजार में ऐसा माहोल बन जाता है कि कई घटिया शेयर भी बहुत महंगे हो जाते हैं. बाजार में नए नए निवेशक पहुँच जाते हैं.

इसके विपरीत बेयरिश मार्किट में हर तरफ ख़ामोशी और निराशा छा जाती है. बड़ी बड़ी कंपनियों के शेयर औंधे मुंह गिरे होते हैं मगर कोई उन्हें पूछता भी नहीं है. निराशा के कारण कोई खरीददार नहीं मिलता. बाजार से निवेशक गायब हो जाते हैं.

 

 

ULIP in Hindi यूलिप क्या है

ULIP in Hindi यूलिप क्या है? आजकल लम्बी अवधि के लिये निवेश करने वालों के लिये यूलिप ULIP (Unit-Linked Insurance Plan) एक पसन्दीदा शब्द है। इसके उचित कारण भी हैं। यूलिप ULIP  निवेश का एक बहुत अच्छा जरिया है यदि आप लम्बी अवधि के लिये निवेशित रहना चहते हैं यानि 10 से 20 वर्षों के लिये । यदि आप कम अवधि के लिये निवेश करना चाहते हैं तो बेहतर है कि किसी कंसल्टेंट की सहायता से म्यूच्यूअल फंड Mutual Fund  में निवेश करें।

यूलिप और म्यूच्यूअल फंड में मुख्य अंतर है अधिभरों (charges) का ढांचा। ULIP में आप जो भी प्रीमियम देते हैं उस में से कुछ हिस्सा इन्शुरन्स के अधिभार के लिए भी काट लिया जाता है.   यूलिप और म्यूचल फंड में बाकी सब समान होते हुए भी यूलिप में निवेश बेहतर हो सकता है अधिभारों में कमी के कारण । FMC फंड मेनेजमेंट चार्ज (इसकी हिंदी शायद होगी कोष प्रबंधन अधिभार) आमतौर पर यूलिप में 1.5% (किसी किसी कम्पनी में यह 0.8% तक कम होता है) होता है जबकी म्यूचल फंड में आमतौर पर FMC 2.5% के आसपास होता है।        

इसीलिये लम्बी अवधि में जब आपका फंड बहुत बड़ा हो जाता है तो 1% का अंतर भी बहुत मायने रखता है और इससे यूलिप के शुरुआती खर्चों की भी आपूर्ती हो जाती है।

यूलिप और म्यूचल फंड में निवेश के दो उदाहरण लेते हैं जो कि 10% की समान दर से बढ़ रहे हैं।

एक आदमी 20 वर्ष के लिये 5 लाख रु के बीमा के साथ यूलिप प्लान लेता है जिसमें वह 1 लाख रु प्रति वर्ष निवेश करता है यदि उसका निवेश 10% की दर से बढ़ता है तो मियाद खत्म होने पर उसे रु 52,21,205/- मिलेंगे |

यही निवेश यदि म्यूचल फंड में किया जाता है और साथ में समान राशि की टर्म इंशोरेंस भी ली जाती है तो 10% की वृद्धी दर पर सभी समयोजनों के बाद मियाद खत्म होने पर रु 48,25,785/- मिलेंगे।

इस प्रकार आप देख सकते हैं कि 1% का अधिभारों में छोटा सा अंतर आपके धन को कितना अधिक बढ़ा सकता है।

यूलिप में आपको बीमा प्लान, बच्चों के प्लान तथा पेंशन प्लान भी मिल जायेंगे। आप इनमें रु 1500/- प्रति माह के न्यूनतम निवेश से भी शुरुआत कर सकते हैं। अधिकतर कम्पनियां ECS की सुविधा भी प्रदान करती हैं।

कैसे समझें तिमाही नतीजे Understanding Quarterly Results in Hindi

Understanding Quarterly Results in Hindi कैसे समझें तिमाही नतीजे आसान हिंदी में विस्तार से यहाँ जानिये.
Understanding Quarterly Results in Hindi कैसे समझें तिमाही नतीजे : आज आईटी यानी सूचना तकनीक की विशाल कम्पनी इन्फोसिस Infosys ने अपने  तिमाही नतीजे पेश किये। आइये जाने कि इन नतीजों को कैसे समझा जाये। जहां बैलेंस शीट (आपको जानकर हैरानी होगी कि बैलेंश शीट को हिंदी में चिट्ठा भी कहा जाता है)  कम्पनी की सेहत का आईना होती है वहीं प्रॉफिट एण्ड लॉस एकाऊंट (लाभ हानि खाता)  कम्पनी की प्रगति का मापक होता है। उपर दिये लिंक से आप इन्फोसिस के तिमाही नतीजे विस्तार से पीडीएफ फाईल में डाऊनलोड कर सकते हैं अथवा यहां दी हुई इमेज फाईल से इसे समझ सकते हैं।

हम यहां आज केवल प्रॉफिट एण्ड लॉस एकाऊंट (लाभ हानि खाता) की बात करेंगे।

सबसे पहला मद है

1.Income from Software services and  products ( सॉफ्टवेयर सेवाओं एवं उत्पादों से आय)अधिकतर इस जगह मद होती है कुल बिक्री से आय (Income from Total Sale) : यहां आपको मिलेगी कम्पनी द्वारा दी गई तिमाही में की गई माल अथवा सेवाओं की बिक्री की रकम। कम्पनी कितनी गति से बढ़ (Growth कर)  रही है यह इसी का सूचक है। यहां आप देखेंगे कि पिछले साल की इसी तिमाही के मुकाबले इन्फोसिस लगभग 51%  बढ़ी है।

2. Software development Expenses (सॉफ्टवेयर संवर्धन लागत) अधिकतर इस जगह मद होती है कुल क्रय लागत: यहां आपको मिलेगी कच्चे माल अथवा सेवाओं की आपूर्ति पर खर्च की गयी रकम। यहां ध्यान देने योग्य बात यह है कि लागत की रकम यदि बिक्री की रकम के मुकाबले कम अनुपात में बढ़ती है तो यह कम्पनी के सेहत के लिये अच्छा है। यहां इन्फोसिस की लागत 53.89% से बढ़ी है।

3. Gross Profit (कुल लाभ) : कुल लाभ बिक्री और क्रय का अन्तर है। यहां कुल लाभ 47%  बढ़ा है।

4. Operating Expenses (प्रभावित खर्चे): यहां कच्चे माल के अलावा माल अथवा सेवाओं के उत्पादन पर किये गये अन्य सभी खर्चे लिये जाते हैं। ध्यान रहे कि यह खर्चे जरूरी नहीं कि माल के उत्पाद के अनुपात में ही बढ़ें। क्योंकि कुछ खर्चे जैसे कि बिलडिंग का किराया या स्टाफ की तन्ख्वाह का माल के उत्पाद से कोई सीधा संबंध नहीं होता है। यहां आने वाले मद इस पर भी निर्भर करते हैं कि कम्पनी किस क्षेत्र में कार्यरत है। इन्फोसिस के खर्चे 42% से बढ़े हैं।

5. Interest and Depreciation (ब्याज एवं अवमूल्यन):  इन खर्चों का उत्पादन प्रक्रिया से कोई संबंध नहीं होता इसलिये इन्हे अलग से गिना जाता है। आयकर की गणना में भी इनका अलग से महत्व है। ब्याज उधार ली गई पूजी पर दिया जाता है। बड़ी पूंजीगत कम्पनियां जहां बड़ी रकम उधार की पूंजी से लगी होती है वहां इस मद का मह्त्व बढ़ जाता है और ब्याज की दरों में परिवर्तन कम्पनी के लाभ पर असरकारक हो सकता है। यहीं यह भी देखने वाली बात है कि जैसे जैसे कम्पनी अधिक लाभ कमा कर उधार चुकता करती जाती है ब्याज की रकम कम होती जाती है और लाभ बढ़ते जाते हैं। अवमूल्यन वास्तव में एक काल्पनिक खर्चा है और कम्पनी इसकी अदायगी नहीं करती।

6. Other Income (अन्य आय) : ध्यान रहे की छोटी और महत्वहीन सी यह रकम आपको बहुत बड़ा धोखा दे सकती है। कभी कभी कम्पनी अपने किसी पुराने निवेश, प्लांट अथवा सम्पत्ती को बेच कर मोटी रकम इस मद में कमा लेती है मगर इस मद में आई बढ़ोतरी वास्तव में कम्पनी की आय में स्थायी बढ़ोतरी नहीं करती। कई बार शुद्ध आय में असाधारण बढ़ोतरी देख कर आनन फानन में कोई शेयर खरीद लिया जाता है मगर यह जरूर जांच लेना चाहिये कि आय में यह बढ़ोतरी कम्पनी के वास्तविक कर्यकलापों के कारण हुई है या अन्य आय के द्वारा।

7. Net Profit (शुद्ध आय) : यह वो रकम है जो करों को चुकाने के बाद कम्पनी के पास बचती है। हर निवेशक का वास्ता इस रकम से होता है। इस रकम का एक हिस्सा निवेशक को लाभांश के रूप मे मिलता है और शेष कम्पनी की पूंजी में जमा हो जाता है यानी इसे कम्पनी के विस्तार, उधार चुकाने अथवा दूसरी कम्पनियों का अधिग्रहण करने के लिये प्रयोग किया जा सकता है। यहां इन्फोसिस के शुद्ध लाभ में 51% की वृद्धि हुई है।

अपडेट : नतीजों की इमेज बदल कर ऑडिटेड रिजल्ट्स की इमेज लगा दी गयी है. आंकड़ों और मदों में कुछ फर्क दिखेगा. अगली बार देखेंगे EPS (प्रति शेयर आय), P/E ratio ( कोई सुझाये कि इसे हिंदी में क्या कहेंगे?) और इनका शेयरों की कीमत से संबंध।

उम्मीद है कि Share Markets in Hindi की यह श्रृंखला आपको पसंद आ रही होगी। आप हमें टिप्पणी कर के बतायें कि Share Markets in Hindi में आगे आप और क्या पढ़ना और जानना चाहते हैं।

तो आज ही से शुरू कर दें कंपनियों के नतीजे पढ़ना और कोशिश करें उन्हें समझने की.

Retirement Solutions in Hindi : Plan for your  Retirement early इंन्फोसिस के चेयरमैन नारायनमूर्ती आज साठ साल की उम्र में रिटायर्ड हो रहे हैं। नारायनमूर्ती इस देश के हीरो हैं, बहुतों के आदर्श हैं मगर उनके जैसी सफलता हर कोई नहीं पा सकता। मगर फिर भी हर किसी का एक सपना होता है कि एक उम्र तक इतना कमा और बचा लिया जाये कि उसके बाद रिटायर्मेंट के सुनहरे दिनों की जिंदगी को जी भर के जिया जाये।

पिछले सौ सालों में एक क्रान्ती हुई है, अनसुनी, अनदेखी, चुपचाप मगर हमारे बिल्कुल पास। शताब्दी की सबसे बड़ी उपलब्धी है दीर्घायू। दुनिया भर में लंबी आयू की वजह से बुजुर्गों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धी हुई है।

केवल भारत में ही 2001 में 7.70 करोड़ बुजुर्ग थे जो कि बढ़ कर 2025 में 17.70 करोड़ हो जायेंगे। हमारी औसत आयू अगले दस वर्षों में 85 हो जायेगी और आबादी का दस प्रतिशत 60 से उपर की उम्र का होगा।

एक और जहां उम्र बढ़ रही है वहीं खर्चे बढ़ रहे हैं। घटती ब्याज दरें और बढती मुद्रास्फीति आपकी जमा पूंजी पर दोधारी तलवार सा असर करती हैं। आप भी अगर कम उम्र में योजनाबद्ध तरीके से अपनी रिटायर्मैंट की योजना अपने कैरियर की शुरुआत में ही बना लेते हैं तो इस सब से बच सकते हैं।

 

उदाहरण के लिये आजके एक करोड़ रुपये की वास्तविक कीमत 5% मुद्रास्फीती के चलते 15 सालों में केवल 48 लाख ही रह जायेगी। आज जिस चीज की लागत 100 रुपये है वो 15 सालों में लगभग 210 रुपये में मिलेगी।

अगर आप युवा हैं तो यह मत समझिये कि अभी तो बहुत टाईम है, बचा लेंगे। आप जितनी जल्दी शुरुआत करेंगे उतना आपको कम बचाना पड़ेगा क्योंकि बाकी काम चक्रवृद्धी की शक्ती करेगी। जैसेकि एक पच्चिस वर्षिय युवा को केवल हर माह 5000/- रुपये ही बचाने होंगे जिससे उसे साठ की आयू में एक करोड़ की पूंजी मिल सके, मगर 35 वर्षिय व्यक्ती को इसके लिये हर माह 11000/- रुपये बचाने होंगे।

                                   S.M.R

                                                    Share Marke Research

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